नाबालिग छात्र के साथ कुकर्म के गंभीर मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषी स्कूल वार्डन की सजा बढ़ा दी है।
⚖️ प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश महेश चंद्र कौशिवा की अदालत ने निचली अदालत द्वारा दी गई दो वर्ष की सजा को अपर्याप्त मानते हुए उसे बढ़ाकर सात वर्ष के कठोर कारावास में तब्दील कर दिया।
🔄 अपील बनी अभिशाप
इस मामले में खास बात यह रही कि
➡️ सजा बढ़ने की वजह खुद दोषी वार्डन की अपील बनी।
दोषी ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सजा माफी और खुद को निर्दोष बताते हुए अपील दायर की थी, लेकिन—
❌ अदालत ने उसकी याचिका खारिज कर दी
✅ वहीं पीड़ित पक्ष की अपील स्वीकार कर ली
👨⚖️ कोर्ट की सख्त टिप्पणी
अदालत ने अपने फैसले में कहा—
🧒 घटना के समय पीड़ित छात्र की उम्र महज 13 वर्ष थी
🏫 अभियुक्त छात्रावास का वार्डन था, जिसकी जिम्मेदारी बच्चों की सुरक्षा थी
⚠️ उसने अपने पद का दुरुपयोग कर नाबालिग को मानसिक और शारीरिक आघात पहुंचाया
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि—
📉 दो वर्ष की सजा अपराध की गंभीरता के अनुपात में बेहद कम थी
📜 क्या है पूरा मामला?
👨💼 अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता अरविंद कपिल के अनुसार—
📅 घटना नवंबर 2011 की है
📍 पीड़ित छात्र देहरादून के खुड़बुड़ा स्थित एक स्कूल के हॉस्टल में रहकर
📚 7वीं कक्षा में पढ़ता था
👤 हॉस्टल का वार्डन
➡️ शक्ति सिंह
➡️ निवासी: हरा, सरधना, मेरठ (उत्तर प्रदेश)
🚨 वार्डन द्वारा लगातार की जा रही हरकतों से
😰 डरा-सहमा छात्र
➡️ स्कूल से भागकर
➡️ अपने पिता के परिचित के पास पहुंचा
➡️ पूरी आपबीती सुनाई
इसके बाद
📞 परिजनों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई।
⚖️ सजा और जुर्माने में बढ़ोतरी
अदालत ने—
🔺 सजा बढ़ाकर 7 वर्ष कठोर कारावास
💰 जुर्माना बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया
📆 साथ ही आदेश दिया कि—
➡️ दोषी शक्ति सिंह
➡️ 29 जनवरी 2026 को
➡️ अदालत में आत्मसमर्पण करे
➡️ जहां से उसे जेल भेजा जाएगा
🛑 संदेश स्पष्ट
अदालत के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि—
⚠️ नाबालिगों के साथ अपराध
❌ किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे
🏫 और शिक्षा संस्थानों में पद पर बैठे लोगों की जिम्मेदारी दोगुनी है
📝 निष्कर्ष
यह फैसला
⚖️ न्याय व्यवस्था की सख्ती
👶 बच्चों की सुरक्षा
📚 और शिक्षण संस्थानों में जवाबदेही
का मजबूत संदेश देता है।


