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📅 09 अक्टूबर 2025 | नैनीताल कोर्ट रिपोर्ट | Crime & Legal Desk | Agresar Bharat Exclusive


मुख्य हाइलाइट्स (Highlights):

🔹 एनडीपीएस एक्ट के तहत बड़ी कार्रवाई — दोषी कैलाश चंद्र शर्मा उर्फ चीमा को 8 साल की कठोर कैद 🧾
🔹 कोर्ट ने लगाया ₹80,000 का जुर्माना, न देने पर 8 माह की अतिरिक्त सजा 🕰️
🔹 मुखानी थाना क्षेत्र में 2023 में दर्ज हुआ था केस 🚓
🔹 विशेष न्यायाधीश (NDPS Act) संजीव कुमार की अदालत ने सुनाया फैसला ⚖️
🔹 अभियोजन पक्ष ने कहा — “अभियुक्त नवयुवकों को नशे की गिरफ्त में फंसा रहा था” 💊


⚖️ नैनीताल कोर्ट का बड़ा फैसला — समाज को नशे से बचाने के लिए सख्त सजा

प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस एक्ट) संजीव कुमार की अदालत ने
स्मैक तस्करी के दोषी कैलाश चंद्र शर्मा उर्फ चीमा को
8 वर्ष के कठोर कारावास और ₹80,000 के जुर्माने की सजा सुनाई है।

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जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को 8 महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।


🚨 मामले की पृष्ठभूमि — 2023 में दर्ज हुआ था मुकदमा

मामला राज्य बनाम कैलाश चंद्र शर्मा उर्फ चीमा से संबंधित है।
थाना मुखानी पुलिस ने 2023 में कैलाश शर्मा के खिलाफ स्मैक तस्करी का मुकदमा दर्ज किया था।

पुलिस जांच पूरी होने के बाद 8 सितंबर 2023 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई थी।
इसके बाद 18 जनवरी 2024 को आरोपी के खिलाफ औपचारिक आरोप तय किए गए।

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🧑‍⚖️ अभियोजन पक्ष का तर्क — “नशे का कारोबार समाज के लिए जहर है”

अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि —

“अभियुक्त स्मैक जैसी घातक नशे की वस्तु को नवयुवकों में बेचकर समाज को नुकसान पहुंचा रहा था।
ऐसे लोगों को कठोर दंड देकर ही समाज को इस बुराई से बचाया जा सकता है।”

सभी साक्ष्यों और तर्कों पर विचार करते हुए
विशेष न्यायाधीश संजीव कुमार ने अभियुक्त को धारा 8/21 NDPS Act के तहत दोषी करार दिया।


📜 सजा का विवरण (Judgement Summary):

विवरण जानकारी
अभियुक्त का नाम कैलाश चंद्र शर्मा उर्फ चीमा
मामला दर्ज थाना मुखानी, वर्ष 2023
धारा NDPS Act की धारा 8/21
चार्जशीट दाखिल 8 सितंबर 2023
आरोप तय 18 जनवरी 2024
सजा 8 वर्ष का कठोर कारावास
जुर्माना ₹80,000
जुर्माना न देने पर 8 माह अतिरिक्त कारावास
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🧠 NDPS एक्ट क्या कहता है?

NDPS (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985) के तहत
मादक पदार्थों (नशे) की तस्करी, भंडारण या बिक्री में शामिल व्यक्ति को
10 वर्ष तक की सजा और आर्थिक दंड दिया जा सकता है।

इस मामले में अदालत ने इसे “सामाजिक अपराध” मानते हुए कठोर दंड दिया है।


🧩 समाज के लिए संदेश — “नशे से दूर रहना ही सुरक्षा है”

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि

“नशे का व्यापार युवाओं के भविष्य को नष्ट कर रहा है।
दोषी का यह कृत्य समाज में भय और नैतिक पतन पैदा करता है,
इसलिए कठोर सजा आवश्यक है।”

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