खबर शेयर करें -

⚖️ कैंची धाम पर हाई कोर्ट सख्त! ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन पर मांगा जवाब

📜 जनहित याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार को नोटिस जारी

Uttarakhand के नैनीताल स्थित विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र कैंची धाम (बाबा नीम करौली आश्रम) के संचालन और वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर Uttarakhand High Court ने कड़ा रुख अपनाया है।

मुख्य न्यायाधीश Manoj Kumar Gupta की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।


🧾 क्या है पूरा मामला?

यह मामला पिथौरागढ़ निवासी ठाकुर सिंह डसीला द्वारा लिखे गए पत्र से शुरू हुआ, जिसे कोर्ट ने जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया।

यह भी पढ़ें -  🐘 🐘 हाथी का तांडव! खेत रौंदे, ग्रामीणों को दौड़ाकर मचाई दहशत

याचिका में आरोप लगाया गया है कि:

  • ट्रस्ट का पंजीकरण विवरण सार्वजनिक नहीं है

  • ट्रस्ट कार्यालय का स्पष्ट पता उपलब्ध नहीं

  • ट्रस्टियों की नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी नहीं

  • स्थानीय प्रशासन के पास भी पूर्ण जानकारी उपलब्ध नहीं


💰 विदेशी चंदे और ऑडिट पर सवाल

याचिकाकर्ता का कहना है कि धाम में हर वर्ष करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है, लेकिन:

  • आय-व्यय का सार्वजनिक ऑडिट उपलब्ध नहीं

  • वार्षिक वित्तीय रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं

  • विदेशी भक्तों से मिलने वाले चंदे के प्रबंधन पर स्पष्टता नहीं

यह भी पढ़ें -  (Big breking)घरेलू गैस की आपूर्ति रहेगी सुचारु, घबराने की जरूरत नहीं: सुरुची इंडेन गैस सर्विस

विदेशी अंशदान नियमों के अनुपालन और नकद दान के लेखा-जोखा पर भी प्रश्न उठाए गए हैं।


🏛️ सरकारी निगरानी की मांग

याचिका में तर्क दिया गया है कि जैसे Badrinath Temple, Kedarnath Temple और Jageshwar Temple जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों का संचालन अधिनियम या सरकारी निगरानी में होता है, वैसे ही इतने बड़े धाम का प्रबंधन भी पारदर्शी ढांचे में होना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि:

  • Indian Trusts Act, 1882 के तहत ट्रस्ट डीड सार्वजनिक की जाए

  • संपत्ति और आय का पूरा विवरण साझा किया जाए

  • वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए

  • प्रबंधन में स्थानीय ग्रामीणों और प्रतिष्ठित नागरिकों को शामिल किया जाए

यह भी पढ़ें -  🔥 हल्द्वानी में दुकान पर ‘वेल्डिंग ताला’! एडवांस किराया न मिलने पर मालिक ने दुकान ही सील कर दी

🔎 आगे क्या?

अब राज्य सरकार को कोर्ट में जवाब देना होगा। यदि अदालत को प्राथमिक दृष्टया अनियमितता नजर आती है, तो धाम के संचालन में संरचनात्मक बदलाव या निगरानी तंत्र मजबूत करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।

⚠️ यह मामला न केवल एक धार्मिक संस्थान की पारदर्शिता से जुड़ा है, बल्कि बड़े धार्मिक ट्रस्टों के वित्तीय प्रबंधन पर व्यापक बहस भी छेड़ सकता है।

Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad

By Editor