देहरादून/लालकुआं (अग्रसर भारत डेस्क): उत्तराखंड सरकार ने ‘एग्री स्टैक योजना’ के अंतर्गत प्रदेश के अन्नदाताओं को एक बड़ी सौगात दी है। अब किसानों को अपनी फार्मर रजिस्ट्री कराने के लिए केवल सरकारी दफ्तरों या विभागीय कर्मचारियों के चक्कर नहीं काटने होंगे। सरकार ने अब प्रदेश भर में फैले जन सेवा केंद्रों (CSC) को भी इस डिजिटल रजिस्ट्री प्रक्रिया से जोड़ दिया है।
क्यों अहम है यह फैसला?
अभी तक यह कार्य केवल कृषि और राजस्व विभाग के कर्मचारियों के माध्यम से ही संपन्न हो पा रहा था। कर्मचारियों पर काम का बोझ अधिक होने और तकनीकी समस्याओं के कारण उधमसिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून जैसे जिलों में डिजिटल रजिस्ट्री का काम काफी धीमा चल रहा था। इस देरी का सीधा असर किसानों की पीएम किसान सम्मान निधि पर भी पड़ रहा था, जो रुकने लगी थी।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने जताई प्रतिबद्धता
प्रदेश के कृषि मंत्री गणेश जोशी के अनुसार, किसानों की परेशानियों और विभागीय कर्मचारियों की मांग को ध्यान में रखते हुए यह जनहितकारी फैसला लिया गया है। इस कदम से न केवल रजिस्ट्री के काम में तेजी आएगी, बल्कि किसानों को उनके घर के पास ही सुविधा मिल सकेगी।
क्या है फार्मर रजिस्ट्री और इसके लाभ?
केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2024 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य कृषि क्षेत्र का पूर्ण डिजिटलीकरण करना है। इसके तहत:
- प्रत्येक किसान को एक डिजिटल पहचान (ID) मिलेगी।
- डेटाबेस में किसान का नाम, भूमि रिकॉर्ड, फसल का विवरण और सरकारी योजनाओं का लाभ ऑनलाइन दर्ज होगा।
- भविष्य में खाद, बीज, सब्सिडी और फसल बीमा का लाभ सीधा और पारदर्शी तरीके से मिलेगा।
कर्मचारी संघ ने किया स्वागत
अधीनस्थ कृषि सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष शुभम आर्य ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सीएससी को शामिल करने से कर्मचारियों पर दबाव कम होगा और राज्य में फार्मर रजिस्ट्री का लक्ष्य समय सीमा के भीतर पूरा हो सकेगा।


