कपकोट/बागेश्वर (अग्रसर भारत डेस्क):
जनपद बागेश्वर के कपकोट स्थित प्रसिद्ध माँ बाराही मंदिर के प्रांगण में गुरुवार को ऐतिहासिक एवं पारंपरिक उत्तरायणी मेले का विधिवत शुभारंभ हो गया। लोक संस्कृति, अटूट आस्था और गौरवशाली परंपराओं के संगम के साथ इस मेले ने क्षेत्र में हर्षोल्लास का संचार कर दिया है।
सांस्कृतिक विरासत और एकता का प्रतीक
माँ बाराही के पावन धाम में आयोजित यह मेला न केवल हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है, बल्कि यह सामाजिक एकता का भी जीवंत प्रतीक है। शुभारंभ के अवसर पर भारी संख्या में उमड़े जनसमूह ने देवी के दर्शन किए और मेले के पारंपरिक आयोजनों का आनंद लिया।
स्थानीय कलाकारों और व्यापारियों को मिला मंच
उत्तरायणी मेला न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और हुनर को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम भी है। मेले के मुख्य आकर्षणों में शामिल हैं:
- लोक संस्कृति: कुमाऊंनी लोकगायकों और सांस्कृतिक दलों की मनमोहक प्रस्तुतियां।
- शिल्पकला: स्थानीय शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पाद।
- व्यापार: क्षेत्रीय व्यापारियों और काश्तकारों के लिए प्रोत्साहन का बड़ा केंद्र।
अपार जनसमर्थन और उत्साह
मेले के पहले दिन क्षेत्रवासियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखने को मिली। स्थानीय प्रशासन और आयोजन समिति ने बताया कि इस बार जनसमर्थन अत्यंत प्रेरणादायी है। श्रद्धालुओं ने माँ बाराही के जयकारों के साथ मेले के विभिन्न स्टालों और लोक कार्यक्रमों का अवलोकन किया।
”यह मेला हमारी लोकपरंपराओं और विरासत को आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाने का सेतु है। इस पावन अवसर पर उमड़ा जनसैलाब क्षेत्र की जीवंतता को दर्शाता है।”
अग्रसर भारत की ओर से सभी क्षेत्रवासियों को उत्तरायणी मेले की हार्दिक शुभकामनाएं!


