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बनभूलपुरा हिंसा के मुख्य आरोपी अब्दुल मलिक की बहू आइशा मलिक की कार से टकरा कर एक नाबालिग की मौत हो गई। घटना को दो माह गुजर चुके हैं। अब मामले की जांच कर रहा दरोगा मृतक की मां को मुआवजे का लालच दे रहा है और कह रहा है कि जो मिल रहा है ले लो, वह मामले में फाइनल रिपोर्ट लगाने जा रहा है। फिलहाल तो सीओ ने मामले की जांच दूसरे दरोगा को दे दी है। 

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अंबेडकर नगर वार्ड 27 निवासी रेखा ने बीती 25 सितंबर को बनभूलपुरा गली नंबर आठ निवासी आइशा मलिक पत्नी अब्दुल मोईद के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस को दी तहरीर में उन्होंने लिखा था कि उनका 10 वर्षीय बेटा भानु किसी काम के लिए घर से निकला था।

बरेली रोड पर तेज रफ्तार कार ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। घटना को अंजाम देने के बाद कार सवार फरार हो गई। उन्होंने बताया कि कार अब्दुल मलिक की बहू और अब्दुल मोईद की पत्नी आइशा मलिक चला रही थी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच मेडिकल चौकी प्रभारी प्रवीण कुमार तेवतिया को सौंपी गई।

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इस मामले में 9 दिन पहले भानु की मां ने सीओ नितिन लोहनी से मुलाकात कर जांच अधिकारी बदलने की मांग की। किन्हीं कारणों से जांच अधिकारी नहीं बदल पाया तो बुधवार को भानु की मां अपनी बेटी के साथ फिर सीओ से मिलने पहुंची। उन्होंने सीओ से कहा कि उन्हें जांच अधिकारी पर भरोसा नहीं है।

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जांच अधिकारी कह रहे हैं कि वह मामले में एफआर लगाएंगे। इसलिए उन्हें जो भी मिल रहा है ले लें। जिसके बाद सीओ नितिन लोहनी ने जांच मेडिकल चौकी प्रभारी प्रवीण कुमार तेवतिया से हटाकर मंडी चौकी प्रभारी भुवन सिंह राणा को सौंप दी। सीओ लोहनी ने बताया कि निष्पक्ष जांच की जाएगी, जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे कार्रवाई होगी।

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