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ट्रेनिंग सेंटर में अग्निवीरों को सुबह 4 बजे ही उठना होता है. सारे काम निपटाकर सुबह 6 बजे हर हाल में इन्हें ग्राउंड पहुंचना होता है. यहां से इनकी बेसिक फिजिकल ट्रेनिंग की शुरुआत हो जाती है.

पिछले साल देशभर में अग्निपथ योजना को लेकर खूब उपद्रव हुआ था. इसके विरोध में तोड़फोड़ से लेकर आगजनी तक की गई थी. राजनीतिक दलों ने भी इस उपद्रव का खूब फायदा उठाया था, लेकिन विरोध के बावजूद रक्षा मंत्रालय ने साफ कर दिया था कि देश के लिए अग्निपथ योजना जरूरी क्यों है. आज इसी योजना के तहत बड़ी संख्या में देश का युवा अलग-अलग मिलिट्री ट्रेनिंग सेंटर्स पर अग्निवीर बनने की ट्रेनिंग (Agniveer Training) ले रहा है. Zee News की टीम ऐसे ही एक ट्रेनिंग सेंटर में पहुंची, जहां अग्निवीरों को फौलाद बनाया जा रहा है.

कैसे हो रही है अग्निवीरों की ट्रेनिंग

ये देश के शूरवीरों की नई पौध है और इनका हौसला इतना है कि देश के दुश्मनों के लिए साक्षात काल बनने को तैयार है. हैदराबाद की जमीन पर दुश्मनों को धूल चटाने के लिए नए शूरवीरों की ट्रेनिंग चल रही है. गोलकोंडा आर्टिलरी सेंटर में अग्निवीरों के पहले बैच के 2,265 जवान कड़ी मिलिट्री ट्रेनिंग से गुजर रहे हैं. रनिंग से लेकर रोलिंग तक और वेपन ट्रेनिंग से लेकर युद्ध की रणनीति समझने तक अग्निवीर दुश्मन को हराने की सारी कलाएं सीख रहे हैं.

अग्निवीरों को दी गई है सैनिकों को मिलने वाली किट

ट्रेनिंग सेंटर में शामिल अग्निवीरों को सैनिकों को मिलने वाली किट भी मुहैया करवाई है. इसमें वर्दी, जूते, बेल्ट, निजी जरुरतों का सामान और बेड शामिल है. इन अग्निवीरों को मिलने वाली मिलिट्री ट्रेनिंग को खास तरीके से डिजाइन किया गया है.

अग्निवीरों को दी जाएगी 31 हफ्तों की ट्रेनिंग

अग्निवीरों को 31 हफ्तों की ट्रेनिंग दी जाएगी. इसमें 10 हफ्तों की बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग मिलेगी, जिसमें बेसिक फिजिकल ट्रेनिंग, हथियार चलाने की ट्रेनिंग, ड्रिल और बेसिक फाउंडेशन शामिल है. इसके बाद इन अग्निवीरों 21 हफ्ते की एडवांस मिलिट्री ट्रेनिंग दी जाएगी. इसमें इन्हें दुश्मनों से लड़ने की खास तकनीक सिखाई जाएगी, जिससे ये भारतीय सेना के हिसाब से काबिल हो पाएंगे.

सुबह 4 बजे उठ जाते हैं देश के नए शूरवीर

ट्रेनिंग सेंटर में अग्निवीरों को सुबह 4 बजे ही उठना होता है. सारे काम निपटाकर सुबह 6 बजे हर हाल में इन्हें ग्राउंड पहुंचना होता है. यहां से इनकी बेसिक फिजिकल ट्रेनिंग की शुरुआत हो जाती है. बीच में एक घंटे के आराम के बाद अग्निवीरों की बेसिक फाउंडेशन क्लास शुरू होती है. इसमें इनको सेना से जुड़ी बेसिक जानकारी दी जाती है और युद्ध से जुड़ी रणनीतियों की बारीकियां सिखाई जाती हैं. यहीं पर उन्हें देश के संविधान के बारे में भी बताया जाता है, ताकि ये बेहतरीन सैनिक के साथ-साथ देश के अच्छे नागरिक की भूमिका भी निभा सकें.

अग्निवीरों के मनोरंजन का भी रखा जाता है ध्यान

अग्निवीरों के लिए फिजिकल ट्रेनिंग के साथ-साथ उनके मनोरंजन का भी ध्यान रखा गया है. फिजिकल ट्रेनिंग के बाद ये अपने मनपसंद खेलों में हिस्सा ले सकते हैं, लेकिन इसके बाद रात होने पर इनकी नाइट ट्रेनिंग शुरु हो जाती है. चीफ इंस्ट्रक्टर कर्नल शालीन सिंह ने बताया कि अग्निवीरों की ट्रेनिंग सुबह सुबह 6 बजे शुरू हो जाती है और 7.30 बजे तक पीटी होती है. इसके बाद 8.30 बजे से 2 बजे तक क्लासेस होती है, जबकि इवनिंग में गेम्स होते हैं. इसके बाद नाइट ट्रेनिंग भी शेड्यूल्ड है. उन्होंने बताया कि यह ट्रेनिंग टफ है, लेकिन साइंटिफिकली डिजायन्ड है. हम इन्हें ग्रेजुअली बिल्डअप करेंगे और ट्रेंड सोल्जर बनाएंगे.

 

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