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भारत से दुश्मनी में अंधी हो चुकी पाकिस्तान की जनता अब दाने-दाने को तरसने को मजबूर है. वहां पर आटे के दाम इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि आप सोच भी नहीं सकते. नतीजतन पूरे देश में भगदड़ और अफरा-तफरी की स्थिति मची हुई है

भारत से अंधी दुश्मनी पड़ोसी पाकिस्तान को बहुत महंगी पड़ रही है. पहले से पेट्रोल-डीजल समेत जरूरी चीजों की महंगाई से परेशान पाकिस्तानी अब पेट भरने के लिए दाने-दाने को भी मोहताज हो गए हैं. वहां पर आटे के रेट (Flour Rate in Pakistan) इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि औसत आमदनी कमाने वाला पाकिस्तानी उसे खरीद नहीं पा रहा है. जो इस महंगे आटे को खरीदने में सक्षम हैं, वे भी एक लिमिट से ज्यादा इसे खरीद नहीं सकते हैं. ऐसे में भूख से तड़पते बच्चों को देखते हुए लोग अब पाकिस्तानी सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन सरकार कोई एक्शन लेने के बजाय आश्वासन की घुट्टी पिलाकर टाइम काट रही है.

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पाकिस्तान में 125 रुपये का एक किलो आटा

पाकिस्तान अखबार डॉन के मुताबिक आटा मिल मालिकों ने आटे के दाम (Flour Rate in Pakistan) में अचानक 11 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है. इसके चलते पंजाब और सिंध प्रांत में 104 रुपये  प्रति किलो बिकने वाला आटा शनिवार को 115 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया. इसके बाद रविवार को बिचौलियो ने इसमें 10 रुपये की और बढ़ोतरी कर दी है. जिसके चलते अब एक किलो आटा 125 रुपये किलो का हो चुका है. यानी कि भारत में 10 किलो आटे का जो पैक 340 रुपये में मिल रहा है, वही पैक अब पाकिस्तान के लोगों को 1250 रुपये में खरीदना पड़ रहा है.

दाने-दाने के लिए तरस रहे पाकिस्तानी 

पाकिस्तान फ्लोर मिल एसोसिएशन (PFMA) के चेयरमैन आमिर अब्दुल्लाह कहते हैं कि सिंध सरकार हर महीने 10 हजार गेहूं की बोरियां हरेक मिल को दे रही है. सर्दियों में आटे की बढ़ी डिमांड की वजह से सरकार की यह सप्लाई नाकाफी साबित हो रही है. इसी के चलते मार्केट में आटे के रेट (Flour Rate in Pakistan) बढ़ते जा रहे हैं. वे कहते हैं कि इस काम में मिल प्रबंधकों की ओर से कोई स्मगलिंग नहीं हो रही है. मिलों से आटा खरीदने वाले व्यापारी जानबूझकर धीरे-धीरे आटे के पैकेट बेच रहे हैं, जिससे उसके दाम और बढ़ सकें.

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सरकारों ने साध रखी है चुप्पी

आमिर अब्दुल्लाह कहते हैं कि एसोसिएशन ने सरकार से आग्रह किया है कि वे 3 महीने बाद नई फसल के आने तक मिलों के दिए जा रहे गेहूं के कोटा में बढ़ोतरी करें, जिससे आटे के दाम और बढ़ने से रोके जा सकें लेकिन सिंध सरकार ने अब तक इस पर कोई रिस्पांस नहीं दिया है.

क्या इस उपाय से सुलझेंगे हालात? 

कराची रिटेल ग्रोसर्स ग्रुप के महासचिव फरीद कुरैशी ने कहा कि सिंध सरकार के पास 7.5 मीट्रिक टन गेहूं का स्टॉक पड़ा है. वह चाहे तो मार्च तक इस गेहूं को सब्सिडाइज्ड रेट में मिल मालिकों को देकर हालात पर काबू (Flour Rate in Pakistan) पा सकती है. उसके बाद बाजार में नई फसल आ जाएगी, जिससे स्थिति काबू हद तक काबू में आ सकती है.

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एक्सपर्टों ने महंगाई पर कही ये बात

पाकिस्तान में विकराल होते हालात को देखते हुए सरकारों में भी घबराहट है. अब सिंध सरकार ने फैसला लिया है कि वह तत्काल प्रभाव से इस सीजन में 1.4 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद करेगी. इसमें एक मीट्रिक टन किसानों से और 4 लाख टन पाकिस्तान के एग्रीकल्चर स्टोरेज  सर्विस कॉरपोरेशन से खरीदे जाएंगे. सरकार की इस पहल से लोगों को कितनी राहत मिलेगी, यह तो भविष्य बताएगा. लेकिन एक्सपर्टो का कहना है कि पाकिस्तान में आटे के जो रेट  (Flour Rate in Pakistan) बढ़ चुके हैं, उसमें अब बहुत ज्यादा कमी आने की संभावना नहीं है.

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