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              असमंजस में बिंदुखत्ता के वाशिंदे

कुछ प्रबुद्ध लोगों का कहना है । वनाधिकार अधिनियम 2006 से 2012 तक के माध्यम से सीधे राजस्व गांव बनने की प्रक्रिया कहीं नहीं है।

वन अधिकार को लेकर के फैसला नहीं कर पा रहे हैं लोग
विधायक डॉ मोहन बिष्ट बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने के लिए पूरी तरह से समर्पित हैं बाकायदा उन्होंने वन अधिकार के प्रावधानों के तहत बिंदुखत्ता के लोगों को उनका मालिकाना हक दिलाने की कवायद तेज कर दी है बावजूद इसके तमाम प्रकार के सवाल फिजाओं में तैर रहे हैं इसी सिलसिले में बीते दिनों बिंदुखत्ता में कुछ प्रबुद्ध लोगों की एक बैठक भी हुई बैठक में इस बात को लेकर के चर्चा हुई की क्या वाकई में।

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बिंदुखत्ता के बाशिंदों को वन अधिकार के प्रावधानों के तहत उनका अधिकार मिलेगा या फिर यह मामला हवा-हवाई हो जाएगा बीते दिनों बिंदुखत्ता में कार रोड के एक स्कूल में हुई बैठक में नागरिकों ने तमाम प्रकार के सवाल खड़े किए हैं जिसमें कहा गया कि यहां की बसावट में बहुत बड़ी संख्या पूर्व सैनिकों की है बहुत बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी है जो किसान पेंशन योजना का लाभ ले रहे हैं इसके अलावा कई ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने ईडब्ल्यूएस के सर्टिफिकेट बनाए हैं।

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तो क्या यह लोग वन एवं उससे संबंधित साधनों पर अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं अगर ऐसा है तो अधिकार के तहत इसका लाभ मिलेगा और अगर ऐसा नहीं है इनका दावा कहीं ना कहीं कमजोर भी पड़ सकता है कुल मिलाकर के बिंदुखत्ता में अब इस बात को लेकर के चर्चा हो रही है कि विधायक डॉ मोहन बिष्ट द्वारा किए जा रहे प्रयास सार्थक हो सकते हैं अथवा मामला हवा हवाई हो जाएगा जो भी हो बिंदुखत्ता में इसको लेकर के प्रबुद्ध जनों की मीटिंग मे इस बात पर भी शंका व्यक्त की गई है कि यदि वन अधिकार के प्रावधान के तहत उन्हें उसका लाभ मिलेगा तो ठीक है।

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लेकिन यह दावा उलट गया तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी इसको लेकर के ग्रामीण आज तक आशंकित नजर आ रहे हैं कुल मिलाकर के इस मामले में जरूरी यह है कि ग्रामीणों को वास्तविकता से रूबरू कराया जाना चाहिए।

 

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