अग्रसर भारत न्यूज़ | लालकुआं
उत्तराखंड की राजनीति में जहाँ अक्सर आरोप-प्रत्यारोप और भ्रष्टाचार की खबरें सुर्खियों में रहती हैं, वहीं लालकुआं विधानसभा के पूर्व विधायक नवीन दुमका का नाम आज भी जनता के बीच ‘ईमानदारी’ और ‘नैतिकता’ का पर्याय बना हुआ है। 2017 से 2022 तक के उनके कार्यकाल को आज भी लोग उनकी स्पष्टवादिता और अवैध कार्यों पर लगाम कसने के लिए याद कर रहे हैं।

ईमानदारी ऐसी कि पार्टी फंड तक कर दिया वापस
राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा नवीन दुमका की उस ईमानदारी की है, जिसकी मिसाल मिलना आज के दौर में दुर्लभ है। बताया जाता है कि चुनाव के दौरान मिली पार्टी फंड की राशि में से जब पैसे बच गए, तो उन्होंने उसे निजी स्वार्थ में खर्च करने के बजाय वापस संगठन को सौंप दिया। यह घटना साबित करती है कि उनके लिए राजनीति सेवा का माध्यम है, न कि धन अर्जन का।
कोविड काल: सेवा का संकल्प और समय की मार
लालकुआं की जनता के बीच एक आम राय यह है कि यदि उनके 5 साल के कार्यकाल में 2-3 साल ‘कोविड’ जैसी वैश्विक महामारी की भेंट न चढ़े होते, तो क्षेत्र के विकास की तस्वीर कुछ और ही होती। संकट के उस कठिन दौर में भी उन्होंने जिस तरह गरीब जनता का ध्यान रखा, वह आज भी लोगों की चर्चाओं में है। आम जनमानस का मानना है कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने कभी अपने आदर्शों से समझौता नहीं किया।
न अवैध खनन, न अवैध शराब: कानून का शासन
नवीन दुमका के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘क्लीन इमेज’ रही। उनके समय में:
- अवैध खनन: क्षेत्र में अवैध खनन की गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगा रहा।
- नशा मुक्ति: अवैध शराब के कारोबार पर उन्होंने जो सख्ती बरती थी, उसकी कमी आज क्षेत्र के युवाओं और परिवारों को खल रही है।
- त्वरित समाधान: जनता का कहना है कि नवीन दुमका समस्याओं को सुनने में नहीं, बल्कि मिनटों में उनके समाधान की कार्रवाई करने में विश्वास रखते थे।
क्या केंद्रीय नेतृत्व करेगा ‘ईमानदार’ छवि पर भरोसा?
आज जब लालकुआं क्षेत्र में नशे और अन्य अवैध गतिविधियों की चर्चाएं फिर से आम होने लगी हैं, तब क्षेत्र की जनता एक बार फिर नवीन दुमका जैसे ‘जमीनी और साफ छवि’ वाले नेता की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। आम जनमानस के बीच यह सवाल तैर रहा है कि क्या पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ऐसे समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता पर दोबारा भरोसा जताएगा?
“अभिवादन करती ईमानदारी” – लालकुआं की सड़कों और चौपालों पर आज यही सुनाई देता है कि विधायक हो तो नवीन दुमका जैसा, जो न केवल स्पष्टवादी हो, बल्कि जिसका दामन भी बेदाग हो।
संपादकीय टिप्पणी: राजनीति में पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन जनता के दिलों में जो जगह नवीन दुमका ने अपनी सादगी और कर्तव्यनिष्ठा से बनाई है, वह उन्हें क्षेत्र के अन्य नेताओं से कोसों आगे खड़ा करती है।


