🔑 मुख्य बिंदु (Highlights)
• जनवरी माह के लिए एफपीपीसीए दरों में बढ़ोतरी
• उपभोक्ताओं से 10 से 43 पैसे प्रति यूनिट अतिरिक्त वसूली
• घरेलू, व्यावसायिक, कृषि और औद्योगिक सभी श्रेणियां प्रभावित
• निर्माण कार्यों के अस्थायी कनेक्शन पर सबसे अधिक भार
• 2025 में नौ महीने बिजली महंगी, सिर्फ तीन बार सस्ती
📰 क्या है एफपीपीसीए और क्यों बढ़ा?
उत्तराखंड।
नए साल में भी राज्य के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को
ऊर्जा निगम की ओर से महंगी बिजली का झटका लगा है।
ऊर्जा निगम ने
जनवरी माह के लिए फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (FPCCA)
की दरों में बढ़ोतरी कर दी है।
इसके तहत उपभोक्ताओं से
➡️ सरचार्ज के रूप में 10 पैसे से 43 पैसे प्रति यूनिट
अतिरिक्त बिजली बिल वसूला जाएगा।
💡 किस श्रेणी में कितनी बढ़ोतरी?
🔹 विशेष श्रेणी
• बीपीएल और स्नो बाउंड क्षेत्र:
➡️ 10 पैसे प्रति यूनिट (सबसे कम वृद्धि)
🔹 घरेलू और व्यावसायिक
• घरेलू उपभोक्ता: 28 पैसे प्रति यूनिट
• कमर्शियल कनेक्शन: 40 पैसे प्रति यूनिट
🔹 सरकारी व कृषि क्षेत्र
• सरकारी संस्थान: 38 पैसे प्रति यूनिट
• निजी ट्यूबवेल: 12 पैसे प्रति यूनिट
🌾 कृषि आधारित कनेक्शन
• 25 किलोवाट तक: 17 पैसे प्रति यूनिट
• 25 से 75 किलोवाट: 19 पैसे प्रति यूनिट
• 75 किलोवाट से अधिक: 20 पैसे प्रति यूनिट
🏭 उद्योग व अन्य श्रेणियां
• एलटी / एचटी इंडस्ट्री: 38 पैसे प्रति यूनिट
• मिक्स्ड लोड, रेलवे, ईवी चार्जिंग स्टेशन: 35 पैसे प्रति यूनिट
• निर्माण कार्यों के अस्थायी कनेक्शन: 43 पैसे प्रति यूनिट (सबसे अधिक)
📝 आदेश जारी
ऊर्जा निगम के
चीफ इंजीनियर (कमर्शियल) एन.एस. बिष्ट
की ओर से
बढ़ी हुई एफपीपीसीए दरों के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
📊 2025 में बिजली कब सस्ती, कब महंगी?
एफपीपीसीए को हर महीने वसूलने की व्यवस्था लागू होने के बाद
उपभोक्ताओं पर लगातार आर्थिक दबाव बना रहा।
✔️ बिजली सस्ती हुई
• जुलाई: 24 पैसे से 1 रुपये प्रति यूनिट (सबसे अधिक राहत)
• नवंबर: 3 से 14 पैसे प्रति यूनिट
• दिसंबर: 1 से 5 पैसे प्रति यूनिट
❌ बिजली महंगी हुई
• जनवरी: 4 से 12 पैसे
• फरवरी: 9 से 28 पैसे
• जून: 17 से 71 पैसे
• अगस्त: 5 से 21 पैसे
➡️ कुल मिलाकर साल में 9 महीने बिजली महंगी रही
📌 निष्कर्ष
लगातार बढ़ते
एफपीपीसीए सरचार्ज के कारण
उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं पर
हर महीने अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है।
नए साल की शुरुआत में ही
बिजली दरों में बढ़ोतरी ने
घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक
सभी वर्गों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।


