अजेय कुमार को मिली राजस्थान की कमान, उत्तराखंड भाजपा में नए ‘चाणक्य’ की तलाश तेज
देहरादून। देश के राजनैतिक घटनाक्रमों और आगामी चुनावी बिसात के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के केंद्रीय नेतृत्व ने एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा सांगठनिक फेरबदल किया है। उत्तराखंड में लंबे समय से भाजपा के संगठन की रीढ़ माने जाने वाले और प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार की जिम्मेदारी को तत्काल प्रभाव से बदल दिया गया है। केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें उत्तराखंड के सांगठनिक मोर्चे से हटाकर अब राजस्थान जैसे बड़े और राजनैतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य का प्रदेश महामंत्री संगठन नियुक्त किया है।
उत्तराखंड में अजेय कुमार का ‘अजेय’ सफर
अजेय कुमार के कार्यकाल को उत्तराखंड भाजपा के इतिहास में सांगठनिक मजबूती का सबसे स्वर्णिम दौर माना जा सकता है। पर्दे के पीछे रहकर रणनीति बुनने में माहिर अजेय कुमार ने राज्य के दुर्गम इलाकों तक पार्टी के ढांचे को न सिर्फ मजबूत किया, बल्कि कई बड़े और जटिल राजनैतिक अभियानों को बेहद कुशलता से अंजाम तक पहुंचाया। उनके कुशल रणनीतिक कौशल के कारण ही पार्टी हर मोर्चे पर विपक्ष पर भारी पड़ती दिखाई दी।
राजस्थान भेजने के पीछे केंद्रीय नेतृत्व की बड़ी रणनीति
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजेय कुमार का यह स्थानांतरण कोई रूटीन फेरबदल नहीं, बल्कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का एक सोचा-समझा रणनीतिक कदम है:
- चुनावी और सांगठनिक अनुभव का लाभ: आगामी राजनैतिक चुनौतियों और संगठन के विस्तार को देखते हुए हाईकमान को राजस्थान में एक ऐसे कड़े और अनुभवी रणनीतिकार की जरूरत थी, जो गुटबाजी से परे होकर संगठन को नई दिशा दे सके।
- बड़ा सांगठनिक पुनर्गठन: इस फैसले को देश भर में भाजपा के भीतर चल रहे व्यापक सांगठनिक फेरबदल के एक हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
उत्तराखंड के राजनैतिक गलियारों में बढ़ी हलचल, कौन होगा नया ‘सारथी’?
अजेय कुमार को राजस्थान की जिम्मेदारी मिलने के बाद अब उत्तराखंड के राजनैतिक हल्कों में कौतूहल और चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म हो गया है।
सवाल यह है कि… विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़े उत्तराखंड में अब संगठन की कमान कौन संभालेगा? चुनाव के इस नाजुक मोड़ पर पार्टी के भीतर सांगठनिक संतुलन बनाए रखने और कार्यकर्ताओं में जोश फूंकने के लिए हाईकमान किस नए चेहरे को ‘महामंत्री संगठन’ के रूप में देहरादून भेजेगा, इस पर सभी की नजरें टिक गई हैं।
बीजेपी का यह बड़ा कदम साफ संकेत देता है कि पार्टी आगामी चुनावों को लेकर किसी भी स्तर पर कोई ढिलाई नहीं बरतने के मूड में है और संगठन की धार को और अधिक पैना करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।


