देहरादून:
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उपजे भारी जनाक्रोश और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित ऑडियो के बीच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। राजधानी देहरादून में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इस मामले में किसी भी अपराधी को संरक्षण नहीं दे रही है और न्याय की प्रक्रिया अपनी गति से पूरी पारदर्शिता के साथ चल रही है।
ऑडियो विवाद और सीएम की चेतावनी
हाल ही में एक कथित ऑडियो क्लिप के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में आए उबाल पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, “एक ऑडियो के नाम पर अनावश्यक बवंडर खड़ा किया जा रहा है। जनता सत्यता सामने आने का इंतज़ार करे। मैं विश्वास दिलाता हूँ कि जो भी दोषी होगा, वह कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रामक सूचनाओं के आधार पर जांच को प्रभावित करने की कोशिश सफल नहीं होगी।
SIT पर भरोसा, CBI जांच को ‘ना’
विपक्ष और प्रदर्शनकारियों द्वारा लगातार की जा रही सीबीआई (CBI) जांच की मांग पर मुख्यमंत्री ने सरकार का रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि:
- वर्तमान में गठित SIT (विशेष जांच दल) अत्यंत पेशेवर तरीके से हर पहलू की जांच कर रही है।
- जब तक SIT अपनी जांच पूरी नहीं कर लेती, मामले को दूसरी एजेंसी को सौंपने का कोई औचित्य नहीं है।
- सरकार को विश्वास है कि SIT की जांच दोषियों को फांसी के फंदे तक ले जाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य जुटा लेगी।
‘प्रभावशाली’ भी नहीं बचेंगे
मुख्यमंत्री ने उन अटकलों को भी खारिज किया जिनमें किसी वीआईपी या प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने के आरोप लग रहे थे। सीएम धामी ने कहा, “जांच में जिसका भी नाम आएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। हमारी प्राथमिकता अपनी बेटी अंकिता को न्याय दिलाना है और इसके लिए शासन स्तर पर कोई ढील नहीं दी जा रही है।”
प्रमुख बिंदु: मुख्यमंत्री के संबोधन से
- निष्पक्ष जांच: SIT को पूरी छूट दी गई है कि वह किसी भी दबाव के बिना काम करे।
- जनता से अपील: अफवाहों पर ध्यान न दें, न्याय व्यवस्था पर विश्वास बनाए रखें।
- कठोर कार्रवाई: अंकिता हत्याकांड के दोषियों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई होगी जो नजीर बनेगी।
अग्रसर भारत दृष्टिकोण
अंकिता भंडारी हत्याकांड में जिस तरह से प्रदेश भर के लोग सड़कों पर उतरकर अपनी संवेदना और आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं, उसने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री का यह बयान उसी दबाव के बीच एक मजबूत प्रशासनिक जवाब माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि SIT की आगामी रिपोर्ट और कथित ऑडियो की फोरेंसिक जांच क्या नए खुलासे करती है।
ब्यूरो रिपोर्ट: अग्रसर भारत, देहरादून


