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🧒 बच्ची का मुंह दबाकर ली थी जान, 2021 का जघन्य मामला

(कोर्ट रिपोर्ट)
पांच वर्ष की मासूम बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के सनसनीखेज मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पोक्सो) रजनी शुक्ला की अदालत ने दोषी को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाते हुए उस पर ₹1 लाख 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। ⚖️

यह मामला वर्ष 2021 का है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था। अदालत ने इसे अत्यंत जघन्य, अमानवीय और समाज को झकझोर देने वाला अपराध माना।


🕯️ क्या है पूरा मामला?

सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता किशोर कुमार ने बताया कि—

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📅 28 जून 2021 को कोतवाली क्षेत्र निवासी पांच वर्षीय बच्ची घर से खेलने के लिए निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी।
👨‍👩‍👧 परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने अपहरण का मुकदमा दर्ज कर तलाश शुरू की।

🔍 सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर एक युवक बच्ची को अपने साथ ले जाता हुआ दिखाई दिया।
⏳ दो दिन बाद बच्ची का शव प्रेमनगर के टी-एस्टेट चाय बागान की झाड़ियों से बरामद हुआ, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई। 😢


🧬 पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट से खुलासा

⚠️ पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि—

  • बच्ची के मुंह में कपड़ा ठूंसकर दुष्कर्म किया गया

  • दम घुटने से उसकी मौत हो गई

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🧬 पुलिस जांच में आरोपी के कपड़ों से मिले बाल और डीएनए साक्ष्य घटनास्थल से मेल खा गए, जिससे अपराध में उसकी संलिप्तता पूरी तरह साबित हो गई।


🚔 आरोपी की गिरफ्तारी

📅 30 जून 2021 को पुलिस ने आरोपी
👉 चुनचुन कुमार महतो
👉 निवासी – बेगूसराय, बिहार
को गिरफ्तार किया था।

पुलिस ने पुख्ता सबूतों के साथ चार्जशीट दाखिल की, जिसके बाद लंबे समय तक सुनवाई चली।


⚖️ अदालत का फैसला

अदालत ने आरोपी को—
✔️ अपहरण
✔️ दुष्कर्म
✔️ हत्या
✔️ पोक्सो अधिनियम

के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

💰 साथ ही लगाए गए ₹1.10 लाख जुर्माने में से
➡️ ₹60,000 पीड़ित परिवार को मुआवजे के रूप में देने के आदेश दिए गए हैं।

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📌 कोर्ट की सख्त टिप्पणी

अदालत ने कहा कि—

❝ नाबालिग बच्चियों के खिलाफ ऐसे अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसे मामलों में कठोरतम सजा आवश्यक है ताकि समाज में कड़ा संदेश जाए। ❞


🔍 निष्कर्ष

यह फैसला
⚠️ बच्चों के खिलाफ अपराधों पर जीरो टॉलरेंस,
⚠️ पोक्सो कानून की सख्ती,
⚠️ और न्याय व्यवस्था की संवेदनशीलता
का मजबूत उदाहरण है।

👉 यह निर्णय न केवल पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में अहम है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि ऐसे जघन्य अपराधों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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By Editor