हल्द्वानी (उत्तराखंड)।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को हल्द्वानी के वनभूलपुरा इलाके में लंबे समय से रह रहे हजारों परिवारों से जुड़े मामले में अहम निर्णय सुनाया। शीर्ष अदालत ने रेलवे की विस्तार और विकास परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक भूमि पर बसे लोगों को जगह खाली करने का आदेश दिया है। 🚆
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि “सार्वजनिक जमीन पर कब्जा करने वाले यह तय नहीं कर सकते कि रेलवे अपनी जमीन का इस्तेमाल कैसे करे।”
🛑 सार्वजनिक भूमि पर दावा नहीं
अदालत ने कहा कि रेलवे लाइनों के बेहद करीब रहना असुरक्षित और जोखिम भरा है। ऐसे में लोगों के हित में यही बेहतर होगा कि वे किसी सुरक्षित स्थान पर पुनर्वासित हों।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि यह राज्य की भूमि है और उसका उपयोग कैसे किया जाए, यह राज्य का विशेषाधिकार है। हालांकि, विस्थापन के दौरान मानवीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
🏠 पीएम आवास योजना के तहत पुनर्वास
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत प्रभावित लोगों को ‘अतिक्रमणकारी’ नहीं बल्कि ‘कब्जाधारी’ कह रही है। उन्होंने जोर दिया कि यदि सरकार पुनर्वास की योजना बना रही है, तो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्रता तय कर उन्हें राहत दी जानी चाहिए।
अदालत ने कहा कि यह हजारों जिंदगियों का सवाल है—बच्चों की पढ़ाई, पीने के पानी की व्यवस्था और रहने की स्थिति जैसे मुद्दों पर संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है। ⚖️
📜 हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती
यह फैसला दिसंबर 2022 में उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर आया है, जिसमें सार्वजनिक भूमि खाली कराने का निर्देश दिया गया था।
जनवरी 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी, जो अब तक प्रभावी थी।
जुलाई और सितंबर 2024 में शीर्ष अदालत ने केंद्र, राज्य सरकार और रेलवे से पुनर्वास योजना पेश करने को कहा था। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि प्रभावित परिवारों का पुनर्वास प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किया जा सकता है।
⚖️ संतुलन और संवेदनशीलता पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विकास परियोजनाएं जरूरी हैं, लेकिन पुनर्वास की प्रक्रिया मानवीय और संतुलित होनी चाहिए।
👉 फिलहाल यह फैसला वनभूलपुरा के हजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा है और प्रशासन पर अब पुनर्वास योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने की जिम्मेदारी है।


