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नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने काठगोदाम से लालकुआं तक बने फोरलेन मार्ग पर बेतरतीब रूप से बनाए गए कटों को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी नैनीताल, आई.जी. यातायात तथा राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) के डायरेक्टर/प्रोजेक्ट मैनेजर को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। न्यायालय ने आदेश दिया है कि अधिकारी अदालत में उपस्थित होकर अपनी स्पष्टीकरण रिपोर्ट पेश करें। इस मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी।

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याचिका पर कार्रवाई

मामले की पृष्ठभूमि में हल्दूचौड़ निवासी सामाजिक कार्यकर्ता शुभम अंडोला, भुवन चंद्र पोखरिया तथा लालकुआं क्षेत्र के ग्रामीणों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। पत्र में कहा गया कि काठगोदाम, लालकुआं, गोरापड़ाव तथा तीनपानी में सड़क चौड़ीकरण के दौरान ‘अनियोजित और बेतरतीब कट’ बना दिए गए हैं, जिसके कारण यातायात व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई है।

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दुर्घटनाएँ और जनहानि

पत्र में दावा किया गया कि पिछले 8 महीनों में ऐसे कटों की वजह से लगभग 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल होकर विभिन्न बाहरी अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि दुर्घटनाओं में मृतकों के परिजनों और घायलों को एनएच अथॉरिटी से मुआवजा दिलाया जाए।

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न्यायालय का रुख

मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने मामले को गंभीर मानते हुए तीनों वरिष्ठ अधिकारियों को सीधे अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सड़क चौड़ीकरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में लापरवाही जनजीवन पर भारी पड़ रही है और इसे किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

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