(अग्रसर भारत ब्यूरो):
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इस बार चुनावी टिकट वितरण की प्रक्रिया में मंडल अध्यक्षों और जिलाध्यक्षों के फीडबैक को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे में संगठन और जनता के बीच कमजोर पकड़ रखने वाले वर्तमान विधायकों के टिकट कटने के आसार बढ़ गए हैं।
चोरगलिया (गौलापार) स्थित एक रिजॉर्ट में आयोजित कुमाऊं मंडल की संगठनात्मक बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी पहुंचे और कार्यकर्ताओं से संवाद किया। इससे पूर्व 9 अगस्त को गढ़वाल मंडल की बैठक संपन्न हुई थी।
बूथ स्तर पर पकड़ और युवा चेहरों पर जोर
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- जमीनी फीडबैक: कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों के अध्यक्षों से मिलने वाली जमीनी रिपोर्ट के आधार पर ही प्रत्याशियों के नाम फाइनल होंगे।
- युवा नेतृत्व की मांग: बैठक में धारचूला, लोहाघाट, अल्मोड़ा, सल्ट और जागेश्वर जैसे विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत जनाधार वाले और योग्य युवा चेहरों को मौका देने की पुरजोर पैरवी की गई।
- 2027 की तैयारी: पदाधिकारियों को बूथ कमेटियों को सक्रिय करने, नए मतदाता जोड़ने और सरकार की विकास योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए।
“विधानसभा चुनाव में संभावित दावेदारों को लेकर मंडल अध्यक्षों व जिलाध्यक्षों की राय अहम रहेगी। बैठकों में उन्हें जनसमस्याओं के निस्तारण की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि सरकार के विकास कार्य धरातल पर पहुंच सकें।”
— महेंद्र भट्ट, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा उत्तराखंड
70 सदस्यीय उत्तराखंड विधानसभा में वर्तमान में भाजपा के 47 विधायक हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आंतरिक सर्वे और संगठनात्मक फीडबैक में जिन विधायकों के प्रति असंतोष की स्थिति पाई जाएगी, पार्टी उनका टिकट काटने में संकोच नहीं करेगी। गैर-भाजपा क्षेत्रों में भी मजबूत जनाधार वाले जिताऊ प्रत्याशियों का आकलन किया जा रहा है।


