नई दिल्ली। देश की स्वास्थ्य सेवाओं में एक ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) के उस बड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत अब पंजीकृत फार्मासिस्ट भी अपना क्लीनिक खोल सकेंगे. इस निर्णय से विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाली आम जनता को त्वरित प्राथमिक उपचार (First Aid) की सुविधा मिल सकेगी.
3 माह की ट्रेनिंग और आवश्यक शर्तें
इस नियम के अंतर्गत फार्मासिस्टों को मरीजों की जांच करने और आवश्यक दवाएं लिखने का अधिकार तो होगा, लेकिन इसके लिए एक अनिवार्य शर्त रखी गई है. क्लीनिक खोलने के इच्छुक फार्मासिस्ट को किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से 3 महीने का एमबीबीएस प्रमाणपत्र कोर्स (ट्रेनिंग) करना होगा. इस कोर्स में उन्हें बीमारियों की पहचान, प्राथमिक उपचार, आपातकालीन स्थिति में दवा देने और गंभीर मरीजों को बड़े अस्पताल में रेफर करने की ट्रेनिंग दी जाएगी.
ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा बड़ा लाभ
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इस फैसले से देश के हजारों पंजीकृत फार्मासिस्टों को सीधा फायदा होगा. ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने में मील का पत्थर साबित होगा. अब ग्रामीण व कस्बाई इलाकों के लोगों को छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, जिससे उनके समय और पैसे दोनों की बचत होगी.


