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मुख्य बिंदु (Highlights):

  • रविवार से लागू हुईं नई दरें: पेट्रोल ₹2.61 और डीजल ₹2.71 प्रति लीटर महंगा।
  • दिल्ली में कीमतें: पेट्रोल ₹102 के पार, डीजल भी ₹95.20 प्रति लीटर पहुंचा।
  • अंतरराष्ट्रीय संकट का असर: ईरान-अमेरिका तनाव के चलते कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के पार।
  • बढ़ेगा मालभाड़ा: फल, सब्जी और राशन समेत रोजमर्रा की सभी वस्तुएं महंगी होने की आशंका।

नई दिल्ली।

देशभर के उपभोक्ताओं को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने करीब 15 महीने के लंबे अंतराल के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। रविवार, 25 मई से लागू हुईं नई दरों के मुताबिक, पेट्रोल के दाम में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल के दाम में ₹2.71 प्रति लीटर का इजाफा किया गया है।

​इस बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गई है। इससे पहले मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ईंधन की कीमतों में ₹2 प्रति लीटर की कटौती की गई थी, जिसके बाद से दाम स्थिर बने हुए थे।

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क्यों बढ़ीं कीमतें? अंतरराष्ट्रीय बाजार में उबला क्रूड ऑयल

​तेल कंपनियों के अनुसार, इस मूल्यवृद्धि का मुख्य कारण वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य है। विशेषकर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में अप्रत्याशित तेजी आई है। कुछ समय पहले तक लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल पर बिकने वाला कच्चा तेल अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुका है।

₹30 हजार करोड़ का मासिक घाटा झेल रही थीं कंपनियां

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के कारण इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी घरेलू सरकारी तेल कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव था। कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा था। इसी घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया था।

 

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चौतरफा महंगाई की आहट: कहां-कहां दिखेगा असर?

​ईंधन की कीमतों में हुए इस इजाफे का सीधा और व्यापक असर आम आदमी के बजट पर पड़ना तय माना जा रहा है:

  • आसमान छुएगा मालभाड़ा: ट्रक, टेम्पो और अन्य मालवाहक वाहनों का परिचालन खर्च बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाले फल, सब्जियां, दूध, राशन और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेजी आएगी।
  • खेती की लागत में वृद्धि: भारतीय कृषि क्षेत्र बड़े पैमाने पर डीजल पर निर्भर है। डीजल महंगा होने से ट्रैक्टर, पंपिंग सेट और अन्य कृषि उपकरणों को चलाना महंगा हो जाएगा, जिससे सीधे तौर पर अनाज और कृषि उत्पादों की लागत बढ़ेगी।
  • महंगा होगा सफर: ईंधन की कीमतों में वृद्धि के बाद सार्वजनिक परिवहन, स्कूल बसों और ऑटो-रिक्शा के किराए में भी जल्द ही बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

समझिए: आपके शहर तक कैसे तय होती है कीमत?

​भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमत और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति के आधार पर तेल कंपनियां हर दिन सुबह 6 बजे नई कीमतें तय करती हैं। उपभोक्ताओं तक पहुंचते-पहुंचते यह कीमत पांच मुख्य चरणों से गुजरती है:

  1. बेस प्राइस (कच्चे तेल की कीमत): अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदे गए कच्चे तेल की मूल लागत।
  2. रिफाइनिंग और कंपनी मार्जिन: क्रूड को पेट्रोल-डीजल में बदलने की लागत और कंपनियों का मुनाफा।
  3. केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty): केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला टैक्स और रोड सेस, जो पूरे देश में एक समान होता है।
  4. डीलर कमीशन: पेट्रोल पंप संचालकों को मिलने वाला निर्धारित लाभांश।
  5. वैट (VAT/Sales Tax): राज्य सरकारों द्वारा अपने स्तर पर लगाया जाने वाला टैक्स। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों और शहरों में पेट्रोल-डीजल के दाम भिन्न होते हैं।
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भविष्य के संकेत: पेट्रोलियम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह उच्च स्तर पर बनी रहीं, तो आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और अधिक बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है।

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