लालकुआं (अग्रसर भारत)।
बिन्दुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की दशकों पुरानी मांग अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर आगामी 18 फरवरी को प्रस्तावित विशाल जुलूस, प्रदर्शन और जनसभा को लेकर पूरे क्षेत्र में भारी उत्साह है। जहाँ एक ओर ग्रामीण अपने अस्तित्व की लड़ाई के लिए लामबंद हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शासन-प्रशासन भी इस बड़े शक्ति प्रदर्शन को देखते हुए पूरी तरह सतर्क है।
सुरक्षा और शांति पर बनी सहमति
आंदोलन के व्यापक स्वरूप को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ समन्वय बैठक की। इस बैठक में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि यह पूरा प्रदर्शन शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न किया जाएगा, ताकि जनता की आवाज बिना किसी व्यवधान के सरकार तक पहुँचे।
क्या है 18 फरवरी का पूरा प्लान?
संघर्ष समिति ने आंदोलन की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया:
- जुलूस और प्रदर्शन: बिन्दुखत्ता से लालकुआं तक विशाल पदयात्रा निकाली जाएगी।
- ज्ञापन: जिलाधिकारी नैनीताल के माध्यम से सरकार को मांग पत्र सौंपा जाएगा।
- जनसभा: जड़ सेक्टर स्कूल परिसर में एक विशाल जनसभा का आयोजन होगा।
- धरना: कार्यक्रम का समापन लालकुआं तहसील में प्रतीकात्मक धरने के साथ होगा।
पूर्व सैनिकों और वालंटियर्स के हाथ में कमान
आंदोलन की गरिमा बनाए रखने के लिए समिति ने करीब 200 वालंटियर तैनात किए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में अनुशासित पूर्व सैनिक शामिल हैं। चूंकि आंदोलन में क्षेत्र के बुजुर्ग भी बड़ी संख्या में शिरकत कर रहे हैं, इसलिए किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए दो एंबुलेंस की विशेष व्यवस्था भी की गई है।
प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी
समन्वय बैठक में एसपी सिटी हल्द्वानी मनोज कत्याल, सिटी मजिस्ट्रेट एपी बाजपेई, उप जिलाधिकारी प्रमोद कुमार, तहसीलदार कुलदीप पांडे और कोतवाली प्रभारी बृजमोहन सिंह राणा ने हिस्सा लिया। अधिकारियों ने समिति को आश्वस्त किया कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध में प्रशासन पूरा सहयोग करेगा।

जनता की निगाहें 18 फरवरी पर
बिन्दुखत्ता का बच्चा-बच्चा अब 18 फरवरी की सुबह का इंतजार कर रहा है। यह केवल एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के मालिकाना हक और सम्मान की लड़ाई बन चुका है। अब देखना यह होगा कि इस जन-दबाव का शासन पर क्या असर पड़ता है।


