हल्द्वानी/देहरादून: लालकुआं के बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। जहां एक ओर स्थानीय ग्रामीण लंबे समय से आंदोलनरत हैं, वहीं अब इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति भी पूरी तरह गर्मा गई है।
पूर्व सीएम हरीश रावत का उपवास
राजस्व गांव की मांग को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने आज देहरादून के गांधी पार्क में एक दिवसीय उपवास और धरना दिया। इस प्रदर्शन में बिंदुखत्ता से भारी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने शिरकत की और सरकार के खिलाफ हुंकार भरी। विपक्ष के इस आक्रामक रुख ने शासन-प्रशासन की हलचल बढ़ा दी है।
कैबिनेट में क्यों नहीं आ पाया प्रस्ताव?
इस पूरे घटनाक्रम पर लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. मोहन बिष्ट ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने का प्रस्ताव आज कैबिनेट की बैठक में पेश होना था, लेकिन तकनीकी कारणों से ऐसा नहीं हो सका।
विधायक के अनुसार:
- दस्तावेजों की कमी: संबंधित पत्रावली (फाइल) में कुछ महत्वपूर्ण कागजात कम थे।
- वन विभाग की देरी: वन विभाग के आला अधिकारियों को इन दस्तावेजों को पूरा करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन वे समय पर इन्हें जमा नहीं कर पाए।
- सचिव से वार्ता: डॉ. बिष्ट ने बताया कि उनकी वन सचिव रवि शंकर से बात हुई है। सचिव ने स्वीकार किया कि शासन द्वारा मांगे गए दस्तावेज समय पर उपलब्ध न हो पाने के कारण मामला कैबिनेट में नहीं जा सका।
होली के बाद बड़ी खुशखबरी की उम्मीद
क्षेत्र की जनता को भरोसा दिलाते हुए विधायक डॉ. मोहन बिष्ट ने कहा कि ग्रामीणों को निराश होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वन विभाग जल्द ही शेष कागजात शासन को मुहैया करा देगा। होली के बाद आयोजित होने वाली कैबिनेट की अगली बैठक में बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा देने का प्रस्ताव निश्चित रूप से पारित कर दिया जाएगा।


