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​😠 दुमका बंगर गन्ना सेंटर पर किसानों का गुस्सा फूटा: उठान ठप होने से खेतों और ट्रालियों में सूख रही फसल

​गन्ना क्रय केंद्र की अव्यवस्था से किसान पर दोहरी मार; गेहूं की बुवाई रुकी, मिल प्रबंधन और ठेकेदार पर मनमानी का आरोप

हल्दूचौड़ (उत्तराखंड)।

​दुमका बंगर गन्ना क्रय केंद्र (गन्ना सेंटर) पर फैली अव्यवस्था अब क्षेत्र के किसानों के लिए दोहरी विपत्ति बनकर सामने आई है। पहले घटतौली और फिर मजदूरों की हड़ताल झेल चुके किसान अब गन्ना उठान पूरी तरह ठप होने से बेबस हो गए हैं। आलम यह है कि क्रय केंद्र पर गन्ना लदी ट्रालियाँ कतारों में खड़ी हैं, जबकि खेतों में कटा पड़ा गन्ना सूखने और खराब होने की कगार पर पहुँच गया है।

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🌾 रबी की बुवाई अटकी, उत्पादन पर खतरा

​गन्ना उठान के ठप होने का सीधा और सबसे बड़ा असर किसानों की रबी सीजन की तैयारी पर पड़ा है। समय पर गन्ने के खेत खाली न हो पाने के कारण गेहूं की बुवाई बुरी तरह प्रभावित हो गई है।

किसानों की पीड़ा: किसानों का कहना है कि गेहूं की बुवाई में देरी का सीधा नुकसान उत्पादन पर पड़ता है, लेकिन क्रय केंद्र की व्यवस्था को संभालने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी नज़र नहीं आ रहा है। उनकी चिंता दोगुनी हो गई है क्योंकि उनकी तैयार फसल बर्बाद हो रही है और अगली फसल की बुवाई भी रुक गई है।

 

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ठेकेदार-मिल प्रबंधन पर मनमानी का आरोप

​ग्रामीणों और किसानों ने इस बिगड़ी स्थिति के लिए सीधे तौर पर मिल प्रबंधन और ठेकेदारों को जिम्मेदार ठहराया है।

  • मूल कारण: किसानों का स्पष्ट आरोप है कि ठेकेदार द्वारा मजदूरों को समय पर भुगतान नहीं किया गया, जिसके कारण मजदूरों ने काम छोड़ दिया और पूरा गन्ना उठान ठप हो गया।
  • मिल प्रबंधन पर ढिलाई: ग्रामीणों ने चीनी मिल में वर्षों से जमे कुछ कर्मियों की मनमानी और मिल प्रबंधन की लचर ढिलाई के चलते हर साल स्थिति बिगड़ने का आरोप लगाया है।
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​किसानों ने मिल प्रबंधन पर ठेकेदारों के आगे नतमस्तक होने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय पर भुगतान सुनिश्चित किया गया होता, तो आज उनकी फसल खेतों और गाड़ियों में इस तरह सूखने की नौबत नहीं आती।

उग्र आंदोलन की चेतावनी

​बेबसी के इन हालात में किसान अपनी गाड़ियों के साथ क्रय केंद्र पर दिन-रात चक्कर काटने को मजबूर हैं।

​किसानों ने एकजुट होकर चेतावनी दी है कि यदि मिल प्रबंधन और प्रशासन ने तत्काल व्यवस्था दुरुस्त नहीं की और गन्ना उठान शुरू नहीं कराया, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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