- लालकुआं (नैनीताल): बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर आज क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों का सैलाब उमड़ पड़ा। जन-सरोकारों और अपने वजूद की लड़ाई को लेकर बिंदुखत्ता के लोग भारी संख्या में जनता इंटर कॉलेज (जड़ सेक्टर) के मैदान में एकत्रित हुए, जहाँ एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया।
अनुशासन के साथ लड़ेंगे हक की लड़ाई
मंच से वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति, धर्म या जाति के विरुद्ध नहीं, बल्कि बिंदुखत्ता के हक और पहचान की है। वक्ताओं ने नेताओं और राजनीतिक दलों पर प्रहार करते हुए कहा कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर अब तक बिंदुखत्ता को उसका जायज हक नहीं मिला। वक्ताओं ने ग्रामीणों में जोश भरते हुए कहा, “हम अनुशासन के दायरे में रहकर अपनी रणनीति और एजेंडा तैयार करेंगे। यह एक ऑपरेशन की तरह है और हम इसे राजस्व गांव घोषित करवाकर ही दम लेंगे।”
महिला और युवा शक्ति का दिखा जज्बा
जनसभा में महिलाओं और युवाओं की उपस्थिति ने आंदोलन को नई ऊर्जा दी। सभा को संबोधित करते हुए कहा गया कि जनता ही असली मालिक है और अधिकारी उनके सेवक। ग्रामीणों से आह्वान किया गया कि वे किसी भी राजनीतिक बहकावे में न आएं और अपने ‘चरित्र और क्षमता’ को पहचानते हुए एकजुट होकर लड़ें।
लालकुआं में जुलूस और तहसील का घेराव
जनसभा के बाद ग्रामीणों का विशाल जत्था लालकुआं शहर में जुलूस निकालेगा। यह शक्ति प्रदर्शन शहर के मुख्य मार्गों से होता हुआ तहसील कार्यालय पहुंचेगा, जहाँ राजस्व गांव की मांग को लेकर धरना दिया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे।
- जनता का सैलाब: पूरा कॉलेज परिसर भरने के बाद भी ग्रामीणों का आना निरंतर जारी है, मैदान अब पूरी तरह खचाखच भर चुका है।
- ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का काफिला: भारी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से पहुंच रहे प्रदर्शनकारियों के कारण जड़ सेक्टर की ओर आने वाले सभी रास्ते जाम हो गए हैं।
- अनंत कतारें: जहां तक नजर जा रही है, सड़कों पर केवल आंदोलनकारियों का हुजूम ही दिखाई दे रहा है, जो बिंदुखत्ता की एकजुटता का प्रमाण है।
- ऐतिहासिक हुंकार: हजारों की इस भीड़ ने साबित कर दिया है कि राजस्व गांव की मांग अब एक जन-आंदोलन बन चुकी है जिसे रोकना नामुमकिन है।
- प्रशासन की मुस्तैदी: मौके पर तैनात पुलिस प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत मोर्चा संभाला और कड़ी मशक्कत के बाद एम्बुलेंस के लिए सुरक्षित रास्ता बनाया।
बिंदुखत्ता की इस विशाल एकता रैली ने शासन और प्रशासन को साफ संकेत दे दिया है कि अब ग्रामीण चुप बैठने वाले नहीं हैं।


