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लालकुआं (नैनीताल)।

उत्तराखंड के प्रमुख रेलवे जंक्शनों में शुमार लालकुआं का रेलवे फाटक इन दिनों स्थानीय जनता के लिए परीक्षा की घड़ी बना हुआ है। व्यस्त रेल मार्ग होने के कारण दिनभर में यह फाटक कई-कई बार और घंटों तक बंद रहता है। इसके चलते क्षेत्र की लगभग 75 हजार से 1 लाख की आबादी को रोजाना भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे गंभीर स्थिति तब पैदा होती है जब आपातकालीन सेवाएं (एम्बुलेंस), आवश्यक सामग्रियां और परीक्षाओं व आवश्यक कार्यों के लिए जाने वाले युवा इस जाम में फंस जाते हैं।

जनता की पीड़ा: ‘समय पर इलाज और काम की चुनौती’

​स्थानीय नागरिकों का कहना है कि फाटक बंद होने से जीवन की रफ्तार पूरी तरह थम जाती है। कई बार गंभीर मरीजों को लेकर जा रही एम्बुलेंस और प्रशासनिक गाड़ियां भी इस जाम में फंस जाती हैं, जिससे अनमोल समय नष्ट होता है। स्थानीय व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों और छात्र-छात्राओं का कहना है कि इस समस्या के स्थायी समाधान के बिना क्षेत्र का पूर्ण विकास अधूरा है। जनता को सरकार की विकास नीतियों पर पूरा भरोसा है, इसलिए वे इस दिशा में जल्द ठोस कदम की उम्मीद कर रहे हैं।

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प्रशासनिक संवेदनशीलता: ओवरब्रिज की रूपरेखा है तैयार

​क्षेत्रीय सूत्रों और जागरूक नागरिकों के अनुसार, सरकार और रेलवे प्रशासन जनता की इस समस्या से भली-भांति अवगत हैं। बताया जा रहा है कि रेलवे और संबंधित विभागों द्वारा इस स्थान पर ‘ओवर ब्रिज

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 के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी या प्राथमिकता में रखा गया है।

एक साझा दृष्टिकोण:

“स्थानीय निवासियों का मानना है कि धामी सरकार और जिला प्रशासन हमेशा से जनकल्याण के कार्यों में आगे रहे हैं। ऐसे में यदि तकनीकी बाधाओं और विभागीय समन्वय को गति देकर इस स्वीकृत ओवरब्रिज के निर्माण कार्य को जल्द धरातल पर उतारा जाए, तो यह सरकार और जनता दोनों के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।”

 

समाधान की ओर बढ़ते कदम

​यह समस्या किसी व्यवस्था की कमी नहीं, बल्कि बढ़ते यातायात और रेल नेटवर्क के विस्तार का स्वाभाविक परिणाम है। शासन और प्रशासन की मंशा हमेशा जनता को राहत देने की रही है। अब आवश्यकता इस बात की है कि संबंधित विभाग, रेलवे और लोक निर्माण विभाग (PWD) आपसी समन्वय बनाकर इस प्रोजेक्ट के बजट और निर्माण प्रक्रिया को गति दें।

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​यदि इस रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज का निर्माण जल्द शुरू होता है, तो न केवल लाखों की आबादी को रोज़ के मानसिक तनाव और जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि आपातकालीन सेवाओं को भी ‘ग्रीन कॉरिडोर’ मिल सकेगा। क्षेत्र की जनता को पूर्ण विश्वास है कि संवेदनशील शासन-प्रशासन जनहित के इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर शीघ्र ही संज्ञान लेकर धरातल पर काम शुरू कराएगा।

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