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उच्च न्यायलय से पूर्व न्यायिक अधिकारी राहुल सिंह को बड़ा झटका लगा है. कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है. राहुल सिंह साल 2019 में उत्तराखंड उच्च न्यायिक सेवा में प्रथम स्थान आए थे, लेकिन उन पर लखनऊ में अपने सहकर्मियों से मारपीट का आरोप लगा था. जिसके चलते इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी सेवा समाप्त कर दी थी.

 उत्तराखंड उच्च न्यायिक सेवा में प्रथम स्थान पर आए उत्तर प्रदेश के एक पूर्व न्यायिक अधिकारी राहुल सिंह की याचिका नैनीताल हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है. राहुल सिंह की उम्मीदवारी नैनीताल हाईकोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की रिपोर्ट के आधार पर निरस्त कर दी थी. जिसे राहुल सिंह ने चुनौती दी थी. मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ में हुई.

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दरअसल, राहुल सिंह जून 2013 से सितंबर 2014 तक उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में तैनात रहे. इस दौरान लखनऊ के एक क्लब में रात में नशे में उनकी अपने अन्य सहकर्मियों से मारपीट हुई. इस अपराध में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 11 न्यायिक अधिकारियों की सेवा समाप्त कर दी थी. जिसमें राहुल सिंह भी शामिल थे. जिसके बाद राहुल सिंह वकालत करने लगे.

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इधर, अप्रैल 2019 में उत्तराखंड उच्च न्यायिक सेवा के 6 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई. जिसमें राहुल सिंह ने भी आवेदन किया और वे मेरिट में प्रथम स्थान पर रहे, लेकिन उन्होंने अपना उक्त अपराध छुपाया था. इस मामले में नैनीताल हाईकोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहुल सिंह के बारे में जानकारी मांगी. जिसमें उनके अपराध की जानकारी थी.

जिसके बाद नैनीताल हाईकोर्ट ने फरवरी 2020 में राहुल सिंह की उम्मीदवारी खारिज कर दी. जिसे उन्होंने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में चुनौती दी थी. इस मामले में हाईकोर्ट ने राहुल सिंह की याचिका खारिज करते हुए कहा कि एक न्यायिक अधिकारी ने क्लब में अपने सहपाठियों के साथ दुर्व्यवहार किया.

इसके बाद उसने इन आरोपों को अपनी उम्मीदवारी में छुपाया. इसके अलावा हायर ज्यूडिशरी सेवा के लिए न्यूनतम 7 साल की वकालत होना जरूरी है. जो राहुल सिंह की पूरी नहीं हुई है. लिहाजा, राहुल सिंह की हाईकोर्ट में चुनौती से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया गया है.

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