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पाटी (चंपावत)।

आजादी के अमृत काल में भी उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से विकास के दावों की पोल खोलती तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं। जनपद चंपावत के पाटी विकासखंड की ग्राम पंचायत सकदेना का पुरमल्ला तोक आज भी बुनियादी सड़क सुविधा के लिए तरस रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि आपातकाल में मरीजों के लिए एंबुलेंस तो दूर, पैदल चलने तक का सुरक्षित रास्ता नहीं है। मात्र एक हफ्ते के भीतर ग्रामीणों को दो गंभीर मरीजों को कुर्सी से बांधकर कई किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक पहुँचाना पड़ा। दुखद बात यह है कि समय पर इलाज न मिलने के कारण एक बुजुर्ग को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

​सड़क के अभाव ने ली बुजुर्ग की जान

​ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, तीन दिन पहले गांव के बुजुर्ग झुबदेव सकलानी को अचानक सांस लेने में गंभीर तकलीफ होने लगी। गांव तक सड़क न होने के कारण ग्रामीणों ने आनन-फानन में उन्हें एक कुर्सी पर बांधा और कंधे के सहारे मुख्य मार्ग तक लाए। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि गांव में सड़क होती, तो झुबदेव जी को समय पर डॉक्टरी सहायता मिल जाती और शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।

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​एक ही हफ्ते में दूसरा मामला

​यह त्रासदी अभी थमी भी नहीं थी कि ऐसा ही एक और वीडियो और मामला सामने आया है। गांव की एक बीमार महिला की स्थिति बिगड़ने पर ग्रामीणों को दोबारा वही खौफनाक रास्ता अपनाना पड़ा। महिला को कुर्सी पर बैठाकर चार से पांच किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक पहुंचाया गया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। लगातार सामने आ रहे ये मामले क्षेत्र की भयावह स्थिति को बयां कर रहे हैं।

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​विधायक निधि की सड़क भी सफेद हाथी साबित हुई

​यह तोक ग्राम पंचायत करौली, बालातड़ी और सकदेना के बीच स्थित है। ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व में करौली से पुरमल्ला तोक तक विधायक निधि से एक सड़क का निर्माण जरूर कराया गया था, लेकिन देखरेख के अभाव में वह अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। गड्ढों और मलबे में तब्दील हो चुके इस मार्ग पर अब पैदल चलना भी जान जोखिम में डालने जैसा है।

​ग्रामीणों की पुकार:

“जब तक गांव में पक्की सड़क नहीं बनेगी, हमारी जिंदगी और मौत के बीच का यह संघर्ष यूं ही चलता रहेगा। सरकार और प्रशासन से हमारी गुहार है कि इस मार्ग का पुनर्निर्माण और विस्तार जल्द से जल्द किया जाए ताकि भविष्य में किसी और को समय पर इलाज न मिलने के कारण दम न तोड़ना पड़े।”

 

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​अब देखना यह है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर कब जागते हैं और पुरमल्ला तोक के ग्रामीणों को इस ‘कंधों के सफर’ से कब मुक्ति मिलती है।

​रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, अग्रसर भारत (पाटी)।

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By पंकज शर्मा

निष्पक्ष, सटीक और त्वरित समाचार आप तक पहुँचाने के संकल्प के साथ 'अग्रसर भारत' की नींव रखी गई है। डिजिटल मीडिया पत्रकारिता (DJNM) में प्रशिक्षित संपादक पंकज शर्मा के नेतृत्व में हमारा लक्ष्य हर खबर को उसकी सच्चाई और जिम्मेदारी के साथ आपके सामने लाना है।