
हल्द्वानी। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और सभी के लिए समान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर शनिवार को हल्द्वानी के तिकोनिया स्थित पंत पार्क में सामाजिक कार्यकर्ताओं और समाज सुधारकों ने शांतिपूर्ण सत्याग्रह किया। प्रदर्शन के माध्यम से सरकार का ध्यान शिक्षा क्षेत्र की समस्याओं की ओर आकर्षित करते हुए व्यापक बदलाव की मांग उठाई गई।
सत्याग्रह में समाज सुधारक दीपचंद पांडे, उजैर फिरोज, यतीश पंत और बच्ची सिंह बिष्ट समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने बैनर और नारों के माध्यम से शिक्षा के अधिकार, सरकारी विद्यालयों की स्थिति और निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे उठाए। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के बिना समाज और देश का समग्र विकास संभव नहीं है।
सरकार के सामने रखीं प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें सभी बच्चों को मुफ्त एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना, नए सरकारी विद्यालय खोलना, मौजूदा स्कूलों का संरक्षण एवं आधुनिकीकरण और पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति करना शामिल है। इसके साथ ही सरकारी शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों के अनावश्यक बोझ से मुक्त करने की मांग भी उठाई गई।
निजी विद्यालयों को लेकर भी प्रदर्शनकारियों ने सख्त कानून बनाने, शिक्षकों को उचित वेतन देने, डोनेशन और कैपिटेशन फीस पर रोक लगाने तथा विद्यार्थियों के भविष्य और करियर की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा सरकारी विद्यालयों में सुनिश्चित करने का सुझाव भी रखा।
कौशल आधारित शिक्षा और पांच दिवसीय कार्य सप्ताह पर जोर
सत्याग्रह के दौरान पाठ्यक्रम में अनावश्यक विषयों को हटाकर कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने तथा ‘एक राष्ट्र, एक शिक्षा’ की अवधारणा लागू करने की मांग भी सामने आई। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षकों के लिए पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे उन्हें शिक्षण कार्य के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा और अनावश्यक कार्यभार कम होगा।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि शिक्षा किसी भी देश के विकास की आधारशिला है। इसलिए सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, समानता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना जरूरी है। पंत पार्क में आयोजित यह सत्याग्रह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।



