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देहरादून: जिला कलेक्ट्रेट में कर्मचारियों के ट्रांसफर का विवाद नया मोड़ ले रहा है. अब प्रकरण में मिनिस्ट्रियल कर्मचारी संघ ने जिलाधिकारी को चिट्ठी लिखकर अपने ही जिला सचिव और पूर्व पदाधिकारी के आरोपों का खंडन कर दिया है. उधर पीसीएस अधिकारी केके मिश्रा ने भी ईटीवी भारत से बात कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है.

देहरादून कलेक्ट्रेट में कर्मचारियों के ट्रांसफर का मामला गर्माने लगा है. प्रकरण को लेकर अब मिनिस्ट्रियल कर्मचारी संघ ने अपने ही जिला सचिव आलोक शर्मा और पूर्व पदाधिकारी राजेंद्र रावत द्वारा लगाए जा रहे आरोपों से खुद को अलग कर लिया है. संघ ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजते हुए स्पष्ट किया है कि जिला सचिव आलोक शर्मा द्वारा की गई शिकायत से संघ का कोई सरोकार नहीं है. इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि संघ के चुनाव 3 मई को संपन्न हुई. जिसके बाद जिला सचिव के रूप में आलोक शर्मा चुने गए. लेकिन उन्होंने इससे पहले ही अप्रैल महीने में मौजूदा पद के लिहाज से शिकायती पत्र दे दिया.

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इस मामले में जिस पीसीएस अधिकारी पर आरोप लगाए गए, उन्होंने भी अपना पक्ष सामने रखते हुए कहा कि जिला कलेक्ट्रेट में ट्रांसफर उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है और इसमें उनका कोई भी रोल नहीं रहता है. ऐसे में कलेक्ट्रेट के कर्मचारियों द्वारा ऐसे मामले पर अधिकारियों का नाम घसीटना सही नहीं है.

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उधर संघ ने अब इस मामले में जिला संगठन की छवि धूमिल किए जाने की बात कहते हुए इस पर पूर्व पदाधिकारी के खिलाफ संगठन स्तर पर निर्णय लेने की भी बात कही गई है. साथ ही ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई है.

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इससे पहले मौजूदा जिला सचिव आलोक शर्मा ने एक चिट्ठी लिखकर जिलाधिकारी से पूर्व में हुए तबादलों पर आपत्ति दर्ज कराई थी और इन तबादलों के फैसले को वापस लिए जाने की मांग की थी.

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