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🔴 हाइलाइट्स (Top Highlights)

  • ⚖️ हाईकोर्ट ने दो अभियुक्तों की सजा निलंबित कर जमानत दी

  • 🧾 ट्रायल में पीड़िता और पिता द्वारा पहचान न करने का तर्क

  • 📅 19–20 अगस्त 2020 की घटना, 2025 में ट्रायल कोर्ट से सजा

  • 👩‍⚖️ विशेष पॉक्सो अदालत से अलग मामले में 10 साल का कठोर कारावास

  • 💰 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया


🏛️ रुद्रपुर सामूहिक दुष्कर्म मामला: हाईकोर्ट का आदेश

उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ—न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ शाह—ने रुद्रपुर के चर्चित सामूहिक दुष्कर्म मामले में सजा काट रहे दो अभियुक्तों, धीर सिंह और अजय कुमार, की सजा को निलंबित कर जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।

यह आदेश अभियुक्तों की आपराधिक अपील और जमानत प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के बाद पारित हुआ। अभियुक्तों ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें दोषी ठहराते हुए कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी।

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📌 क्या था मूल मामला?

अभियोजन के अनुसार, 19–20 अगस्त 2020 की रात आरोप था कि अभियुक्तों ने अन्य साथियों के साथ मिलकर एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

रुद्रपुर की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने 22 जुलाई 2025 को दोनों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई थी।


🧾 पहचान को लेकर उठा सवाल

हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि:

  • ट्रायल के दौरान पीड़िता ने अभियुक्तों की पहचान नहीं की

  • पीड़िता के पिता ने भी नाम नहीं लिया

  • मुख्य गवाहों ने पहचान से इनकार किया

बचाव पक्ष का कहना था कि जब प्रमुख गवाह और स्वयं पीड़िता ही पहचान नहीं कर पा रहे, तो दोषसिद्धि का आधार कमजोर हो जाता है। इसी आधार पर सजा निलंबन की मांग की गई, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए जमानत मंजूर की।

⚠️ ध्यान रहे: सजा निलंबन का अर्थ बरी होना नहीं है। अंतिम निर्णय अपील के निस्तारण के बाद होगा।


🔒 दूसरा मामला: पॉक्सो अदालत से 10 साल की सजा

📍 थाना क्षेत्र: पंतनगर

एक अन्य मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अश्वनी गौड़ की अदालत ने छात्रा से घर में घुसकर दुष्कर्म करने के आरोपी को दोषी ठहराते हुए:

  • ⛓️ 10 वर्ष का कठोर कारावास

  • 💰 20,000 रुपये अर्थदंड

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की सजा सुनाई है।

📰 क्या था मामला?

अभियोजन के अनुसार, 8 मार्च 2023 की रात पंतनगर थाना क्षेत्र में एक किशोरी अपने छोटे भाइयों के साथ घर पर अकेली थी। आरोप है कि भुलाई उर्फ भोलई यादव नामक व्यक्ति दरवाजा तोड़कर घर में घुसा, बिजली बंद की और दुष्कर्म किया।

30 मार्च 2023 को आरोपी ने दोबारा घर में घुसकर घटना दोहराई। बाद में पीड़िता ने परिजनों को जानकारी दी, जिसके आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।

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जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।


⚖️ कानूनी परिप्रेक्ष्य

  • हाईकोर्ट द्वारा सजा निलंबन एक अंतरिम राहत है

  • पॉक्सो मामलों में दोषसिद्धि पर कठोर दंड का प्रावधान

  • अपील प्रक्रिया के दौरान साक्ष्यों की दोबारा न्यायिक समीक्षा संभव


📝 निष्कर्ष

एक ओर हाईकोर्ट ने साक्ष्यों में पहचान संबंधी कमजोरियों को देखते हुए दो अभियुक्तों की सजा निलंबित की है, वहीं दूसरी ओर पॉक्सो अदालत ने ठोस साक्ष्यों के आधार पर 10 वर्ष की सजा सुनाकर कड़ा संदेश दिया है।

⚖️ दोनों मामलों ने न्यायिक प्रक्रिया, साक्ष्य और गवाहों की भूमिका पर गंभीर चर्चा को जन्म दिया है।

नोट: सभी मामले न्यायालय में विचाराधीन/अपीलाधीन हैं। अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद ही निर्धारित होंगे।

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By Editor