देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में संवेदनशील माने जाने वाले इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) के समीप एक इस्लामिक संस्थान (इस्लामिक यूनिवर्सिटी) के लिए 20 एकड़ जमीन आवंटित किए जाने के प्रस्ताव पर बड़ा सियासी और सामाजिक बवाल खड़ा हो गया है। इस मामले ने न केवल सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि स्थानीय संगठनों और विपक्षी दलों के बीच तीखी बहस भी छेड़ दी है।
विवाद का मुख्य कारण
विवाद की जड़ जमीन की लोकेशन है। यह प्रस्तावित जमीन देश के प्रतिष्ठित सैन्य संस्थान IMA के बेहद करीब स्थित है। विरोध कर रहे संगठनों का तर्क है कि इतने संवेदनशील सैन्य क्षेत्र के पास बड़े धार्मिक संस्थान का निर्माण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है।
विरोध के प्रमुख बिंदु:
- सुरक्षा चिंताएं: जानकारों का कहना है कि IMA एक रणनीतिक संस्थान है। इसके आसपास किसी भी बड़े निजी या धार्मिक निर्माण से सैन्य गोपनीयता और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
- जनसांख्यिकीय परिवर्तन (Demographic Change): स्थानीय समूहों का आरोप है कि इस तरह के आवंटन से क्षेत्र की डेमोग्राफी में बदलाव आएगा, जो भविष्य में तनाव का कारण बन सकता है।
- भूमि आवंटन की प्रक्रिया: सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस बेशकीमती और संवेदनशील जमीन को आवंटित करने की अनुमति किस आधार पर दी गई।
सियासी सरगर्मी
इस खबर के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर ‘लैंड जिहाद’ जैसे शब्दों के साथ सरकार और प्रशासन को घेरा जा रहा है। वहीं, कुछ हलकों में इसे शिक्षा के विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन बहुमत की चिंता सुरक्षा पहलुओं को लेकर है। प्रशासन इस मामले में अभी स्थिति स्पष्ट करने और दस्तावेजों की जांच की बात कह रहा है।
नोट: इस खबर के प्रकाश में आने के बाद हिंदूवादी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर जमीन दी गई, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे।


