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लालकुआं:

बिंदुखत्ता क्षेत्र को वन अधिकार कानून के तहत ‘राजस्व ग्राम’ घोषित किए जाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब और अधिक आक्रामक होता जा रहा है। 15 अगस्त की पदयात्रा और 27 सितंबर की महारैली के बाद 5 अक्टूबर से तहसील परिसर में जारी अनिश्चितकालीन धरने के सातवें दिन (रविवार को) बिंदुखत्ता के सभी 32 ग्रामों के संयोजक और सहसंयोजक क्रमिक अनशन व धरने पर बैठे।

​हल्द्वानी में होगा उग्र प्रदर्शन, जिलाधिकारी का होगा घेराव

​धरना स्थल पर गीत-संगीत और ओजस्वी संबोधनों के माध्यम से वक्ताओं ने राजस्व ग्राम की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया। इस दौरान सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि 15 दिसंबर के बाद हल्द्वानी में एक विशाल महारैली आयोजित की जाएगी, जिसमें जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

​वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि दिसंबर में प्रस्तावित इस आंदोलन को व्यापक रूप देने के लिए धरने के साथ-साथ बिंदुखत्ता के प्रत्येक घर तक जन-संपर्क अभियान चलाया जाएगा। इस बार की महारैली में बिंदुखत्ता के अलावा अन्य वन भूमि पर बसे क्षेत्रों को भी शामिल करने की रणनीति बनाई जा रही है, ताकि वन भूमि पर निवास कर रहे समस्त नागरिकों के अधिकारों की आवाज को और अधिक मजबूती मिल सके।

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​मुख्यमंत्री की दोटूक पर जताई नाराजगी

​इससे पूर्व, शनिवार को देहरादून में मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल के सदस्य कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट और कैप्टन चंचल सिंह कोरंगा ने आंदोलनकारी संगठन को वस्तुस्थिति से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि बिंदुखत्ता के वनाधिकार कानून के अंतर्गत दावे सर्वसम्मति से स्वीकृत होने के बावजूद, राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने के बजाय वन भूमि के अनारक्षण (डिफॉरेस्टेशन) से संबंधित पत्रावली केंद्र सरकार के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) भेजी जा रही है।

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​इस बात पर वन अधिकार संगठन ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। संगठन ने सवाल उठाया कि जब सरकार को वन भूमि अनारक्षण की लंबी प्रक्रिया अपनानी ही है, तो सरकार यह स्पष्ट करे कि इसके एवज में दोगुनी वन भूमि कहाँ उपलब्ध कराई जाएगी? साथ ही, पत्रावली सुप्रीम कोर्ट जाने की स्थिति में ‘बापू ग्राम’ जैसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, क्योंकि वन विभाग आज भी बिंदुखत्ता की सैकड़ों वर्ष पुरानी बसासत को अतिक्रमण की श्रेणी में ही दर्शाता है?

​उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) का मिला खुला समर्थन

​आंदोलन को समर्थन देने उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती, पूर्व विधायक नारायण सिंह जंतवाल और जनमैत्री संगठन के बच्ची सिंह बिष्ट समेत सैकड़ों यूकेडी कार्यकर्ता धरना स्थल पर पहुंचे और राजस्व ग्राम की मांग को पूर्ण समर्थन दिया।

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​प्रमुख रूप से इनकी रही उपस्थिति

​धरना स्थल पर वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट, अर्जुन नाथ गोस्वामी, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू, कैप्टन इंद्र सिंह पनेरी, कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट, कैप्टन चंचल सिंह कोरंगा, कैप्टन खुशाल सिंह कोश्यारी, नारायण सिंह कोरंगा, सूबेदार खड़क सिंह पपोला, एडवोकेट बलवंत बिष्ट, श्याम सिंह रावत, बसंत पांडेय, लक्की जोशी, राजेंद्र सिंह बिष्ट, रमेश गोस्वामी, भरत नेगी, दीपक जोशी, महेश फुलारा, भूपेश जोशी, नवीन जोशी, दीपक पाठक, जीवन पांडे, ममता बिष्ट, गोविंद गिरी, दौलत सिंह कोरंगा, पूरन लोहनी, बिशन सिंह पपोला, मोहन राम, धन गिरी गोस्वामी, पार्वती भट्ट और गंगा देवी सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।

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By पंकज शर्मा

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