
उत्तराखंड में डॉक्टरों पर सख्ती की तैयारी: सरकारी नौकरी छोड़ने या ज्वाइन न करने पर दोबारा भर्ती का मौका मुश्किल, मरीजों से प्रचार कराया तो लाइसेंस पर कार्रवाई
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने भर्ती नियमावली में बदलाव के निर्देश दिए। दुर्गम क्षेत्रों में खाली पदों की समस्या दूर करने और मरीजों के जरिए डॉक्टरों के निजी प्रचार पर रोक लगाने की तैयारी।
देहरादून। उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए राज्य सरकार भर्ती व्यवस्था में बदलाव की तैयारी कर रही है। मेडिकल ऑफिसर के पद पर चयनित होने के बाद नियुक्ति पर ज्वाइन नहीं करने वाले डॉक्टरों के लिए दोबारा भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के रास्ते बंद किए जा सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने इस संबंध में अधिकारियों को भर्ती नियमावली में संशोधन करने के निर्देश दिए हैं।
सरकार का मानना है कि चयन के बावजूद डॉक्टरों के ड्यूटी पर नहीं पहुंचने और कुछ समय बाद नौकरी छोड़ देने से सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ता है। खासकर पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती मिलने पर कई पद खाली रह जाते हैं। इसके अलावा डॉक्टरों की ओर से मरीजों का इस्तेमाल अपने प्रचार के लिए करने पर भी सख्ती की तैयारी है। ऐसा करने पर लाइसेंस निरस्त किए जाने की कार्रवाई का प्रावधान लागू करने की बात कही गई है।
चयन के बाद ज्वाइन नहीं करने वाले डॉक्टरों पर लगेगी रोक
स्वास्थ्य विभाग में मेडिकल ऑफिसर के पदों पर चयन होने के बावजूद कई डॉक्टर नियुक्ति स्थल पर कार्यभार ग्रहण नहीं करते। कुछ डॉक्टर नौकरी शुरू करने के बाद भी दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती के कारण सेवा छोड़ देते हैं।
समस्या तब और बढ़ जाती है, जब ऐसे डॉक्टर बाद में खाली पदों पर होने वाली नई भर्ती प्रक्रिया में फिर शामिल हो जाते हैं। यदि मनचाही या सुगम जगह पर तैनाती मिल जाए तो नौकरी जारी रखते हैं, अन्यथा पद छोड़ने की स्थिति बन जाती है। इससे विभाग को रिक्त पदों को भरने के लिए बार-बार भर्ती प्रक्रिया चलानी पड़ती है।
अब सरकार इसी व्यवस्था पर अंकुश लगाने की तैयारी में है। प्रस्तावित बदलाव के तहत चयन के बाद ज्वाइन नहीं करने वाले डॉक्टरों को भविष्य की भर्ती में दोबारा अवसर देने पर रोक लगाई जा सकती है। हालांकि, यह व्यवस्था किस तरह लागू होगी और किन परिस्थितियों में छूट मिलेगी, इसकी जानकारी नियमावली में संशोधन के बाद ही स्पष्ट होगी।
दुर्गम क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी दूर करना चुनौती
उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों के पद खाली रहने से मरीजों को उपचार के लिए दूसरे शहरों या बड़े अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है।
चयनित डॉक्टरों के ज्वाइन नहीं करने या नौकरी छोड़ने से सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध मानव संसाधन की योजना प्रभावित होती है। सरकार की कोशिश है कि भर्ती प्रक्रिया के जरिए चयनित होने वाले डॉक्टर वास्तव में निर्धारित अस्पतालों में सेवाएं दें और रिक्त पद लंबे समय तक खाली न रहें।
मरीजों से निजी प्रचार कराया तो डॉक्टरों पर कार्रवाई
सरकार डॉक्टरों के पेशेवर आचरण को लेकर भी सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, डॉक्टर अपने प्रचार के लिए मरीजों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। ऐसा करने पर उनका लाइसेंस निरस्त करने तक की कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई है।
इस कदम का उद्देश्य मरीजों की गरिमा, निजता और चिकित्सा पेशे की गरिमा की रक्षा करना है। हालांकि, प्रतिबंध का सटीक दायरा, लागू होने की प्रक्रिया और लाइसेंस निरस्तीकरण से संबंधित प्रावधानों का अंतिम स्वरूप आधिकारिक नियमों से स्पष्ट होगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने दिए नियमावली में बदलाव के निर्देश
स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के अनुसार, सरकारी अस्पतालों के लिए चयनित होने के बाद ज्वाइन नहीं करने वाले डॉक्टरों को दोबारा भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने से रोकने के लिए अधिकारियों को नियमावली में बदलाव करने को कहा गया है।
फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यह बदलाव तैयारी के चरण में है। संशोधित नियम कब से लागू होंगे, किन डॉक्टरों पर लागू होंगे और पहले से चयनित या नौकरी छोड़ चुके डॉक्टरों के मामलों में क्या व्यवस्था होगी—इन बिंदुओं पर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
एक नजर में: क्या बदलने की तैयारी है?
- भर्ती नियमों में संशोधन: चयन के बाद ज्वाइन नहीं करने वाले डॉक्टरों के दोबारा भर्ती में शामिल होने पर रोक लगाने की तैयारी।
- दुर्गम क्षेत्रों पर फोकस: पर्वतीय अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और रिक्त पदों की समस्या दूर करने का प्रयास।
- मरीजों से प्रचार पर रोक: मरीजों का इस्तेमाल निजी प्रचार के लिए करने पर कार्रवाई की तैयारी।
- लाइसेंस पर कार्रवाई: प्रचार संबंधी नियमों के उल्लंघन पर लाइसेंस निरस्त करने तक का प्रस्तावित कदम।
- अंतिम नियमों का इंतजार: संशोधन की प्रभावी तारीख और विस्तृत शर्तें आधिकारिक अधिसूचना से स्पष्ट होंगी।
🌟 Agresar Bharat Insight 💡
उत्तराखंड में डॉक्टरों की भर्ती से जुड़ा यह प्रस्ताव केवल नियुक्ति प्रक्रिया का मामला नहीं, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की बड़ी चुनौती से भी जुड़ा है। नियमों में सख्ती से चयनित डॉक्टरों की जवाबदेही बढ़ सकती है, लेकिन दुर्गम क्षेत्रों में लंबे समय तक डॉक्टरों को बनाए रखने के लिए बेहतर सुविधाएं, सुरक्षित कार्यस्थल और प्रोत्साहन भी महत्वपूर्ण होंगे। मरीजों के हितों की रक्षा के लिए प्रचार संबंधी नियमों को स्पष्ट और पारदर्शी बनाना भी जरूरी होगा। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार संशोधित नियमावली को किस स्वरूप में लागू करती है।



