खबर शेयर करें -

📰 लालकुआं से बड़ी खबर

🔥 बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग तेज, पूर्व सैनिकों और संगठनों ने शुरू किया क्रमिक अनशन

📍 लालकुआं: सैनिक बाहुल्य क्षेत्र बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित किए जाने की मांग अब आंदोलन का रूप ले चुकी है। वन अधिकार संगठन और पूर्व सैनिक संगठन के संयुक्त तत्वावधान में शहीद स्मारक, बिंदुखत्ता में क्रमिक अनशन शुरू हो गया है।


🚨 आंदोलन का पहला दिन: दिखी मजबूत एकजुटता

अनशन के पहले दिन विभिन्न सामाजिक वर्गों, पूर्व सैनिकों और राज्य आंदोलनकारियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर अपनी एकता का प्रदर्शन किया।

यह भी पढ़ें -  ​लालकुआं: समिति चुनाव की आचार संहिता का पूर्ण पालन करते हुए देशभक्ति के साथ संपन्न हुआ उत्सव, वीडियो

अनशन में शामिल प्रमुख लोग:

  • अर्जुन नाथ गोस्वामी (अध्यक्ष, वन अधिकार समिति)
  • पूर्व ब्लॉक प्रमुख संध्या डालाकोटी
  • मोहिनी मेहता, ममता बिष्ट
  • प्रकाश उत्तराखंडी, ललित कांडपाल
  • विक्की पाठक, पूरन सिंह परिहार (राज्य आंदोलनकारी)
  • बलवीर सिंह रावत, कुंवर सिंह पवार (पूर्व सैनिक)
  • भूपेश जोशी

आगे की रणनीति क्या है?

📌 यह क्रमिक अनशन दो दिनों तक जारी रहेगा
📌 इसके बाद एक बड़ी जनसभा आयोजित की जाएगी
📌 आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी

यह भी पढ़ें -  लालकुआं (बड़ी खबर) सांसद अजय भट्ट ने स्वतंत्रता दिवस पर रिबन काटकर किया लोकार्पण, नगर के प्रवेश मार्गों को मिला नया व आकर्षक स्वरूप

🗣️ संगठन का पक्ष

वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश भट्ट ने कहा कि:
👉 बिंदुखत्ता के हजारों परिवार दशकों से वनभूमि पर रह रहे हैं
👉 वे पूरी तरह से वन अधिकार अधिनियम, 2006 की शर्तों को पूरा करते हैं
👉 इसके बावजूद उन्हें राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिला


👥 जनसमर्थन भी बढ़ा

आंदोलन को समर्थन देने पहुंचे प्रमुख लोगों में:
बलवंत सम्मल, पीयूष जोशी, विजय सिंह दानू, बलवंत सिंह कोरंगा, केदार सिंह कोरंगा, मनोज सिंह कोरंगा, मनोज गोसाईं, नंदन सिंह कुनियाल, गोविंद सिंह, गौरव कोरंगा, हीरा सिंह बिष्ट, बसंत पांडे, रणजीत सिंह, नारायण कोरंगा सहित कई लोग मौजूद रहे।

यह भी पढ़ें -  लालकुआं: वरिष्ठ भाजपा नेता के पुत्र पर नुकीले हथियार से जानलेवा हमला, बेस अस्पताल में भर्ती; नशे के विरोध पर रंजिश का आरोप

📊 मामला क्यों है अहम?

👉 हजारों परिवारों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा
👉 पूर्व सैनिकों की बड़ी आबादी प्रभावित
👉 लंबे समय से लंबित मांग
👉 सरकार पर बढ़ता दबाव


✍️ एडिटर नोट

बिंदुखत्ता का यह आंदोलन अब सिर्फ एक मांग नहीं, बल्कि अधिकारों की लड़ाई बन चुका है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।


 

ADVERTISEMENTS Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad