दक्षिण मुंबई के पायधुनी इलाके से एक अत्यंत दुखद और चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहाँ ‘फूड पॉइजनिंग’ के संदिग्ध मामले में एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई। मृतकों में पति-पत्नी और उनकी दो मासूम बेटियां शामिल हैं। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है और स्वास्थ्य विभाग को भी हैरत में डाल दिया है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार (26 अप्रैल 2026) की रात परिवार ने घर पर कुछ रिश्तेदारों को भोजन पर आमंत्रित किया था। सभी ने मिलकर रात करीब 10:30 बजे बिरयानी/पुलाव का सेवन किया। रिश्तेदारों के जाने के बाद, देर रात लगभग 1:30 बजे परिवार के चारों सदस्यों ने तरबूज खाया।
तरबूज खाने के कुछ ही समय बाद चारों को उल्टी, चक्कर और दस्त की शिकायत होने लगी। स्थिति बिगड़ते देख उन्हें तुरंत पास के जे.जे. अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान एक-एक कर चारों ने दम तोड़ दिया।
मृतकों की पहचान:
- अब्दुल्ला डोकाडिया (44 वर्ष): परिवार के मुखिया, जो अंधेरी में मोबाइल एक्सेसरीज की दुकान चलाते थे।
- नसरीन (35 वर्ष): अब्दुल्ला की पत्नी।
- आयशा (16 वर्ष): बड़ी बेटी।
- ज़ैनब (12 वर्ष): छोटी बेटी।
जांच के घेरे में तरबूज
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन रिश्तेदारों ने केवल बिरयानी खाई थी, वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। लक्षणों की शुरुआत तरबूज खाने के बाद हुई, जिससे प्राथमिक तौर पर तरबूज में किसी घातक रसायन या संक्रमण (Toxins) की आशंका जताई जा रही है। अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, पीड़ितों की किडनी पर बहुत बुरा असर पड़ा था।
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
मुंबई पुलिस ने फिलहाल एक्सीडेंटल डेथ (ADR) का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने घर में बचे हुए भोजन और तरबूज के नमूनों को जांच के लिए ‘फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी’ (FSL) भेज दिया है। जे.जे. अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय सुरासे ने बताया कि “केवल बासी तरबूज से इतनी जल्दी मौत होना दुर्लभ है, संभवतः इसमें कुछ खतरनाक मिलावट या केमिकल हो सकता है।”
अग्रसर भारत अपने पाठकों से अपील करता है कि गर्मी के मौसम में कटे हुए फलों या बाजार से खरीदे गए फलों को अच्छी तरह धोकर और उनकी शुद्धता सुनिश्चित करने के बाद ही सेवन करें।


