रामनगर/देहरादून। उत्तराखंड के नैनीताल जिले के अंतर्गत रामनगर के निवासी और मर्चेंट नेवी के कैप्टन अजय पंत को ब्रिटेन में गिरफ्तार कर लिया गया है। ब्रिटेन की ‘नेशनल क्राइम एजेंसी’ (NCA) ने उन पर रूस से प्रतिबंधित कच्चे तेल के परिवहन से संबंधित अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। इस मामले में दोषी सिद्ध होने पर उन्हें अधिकतम 10 वर्ष तक के कारावास की सजा हो सकती है। वर्तमान में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, और मामले की आगामी सुनवाई 16 जुलाई को बॉर्नमाउथ क्राउन कोर्ट में निर्धारित की गई है।
ब्रिटिश मरीन कमांडोज का मध्यरात्रि अभियान
ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कैप्टन अजय पंत रूसी कच्चे तेल को लेकर भारत आ रहे मालवाहक जहाज (टैंकर) ‘एमवी स्मिर्टोस’ (MV Smyrtos) के कमांडर थे। यह पोत 4 जून को रूस के उस्त-लूगा टर्मिनल से लगभग 1.01 लाख टन कच्चा तेल लेकर गुजरात के सिक्का बंदरगाह के लिए प्रस्थान कर चुका था।
14 जून की मध्यरात्रि को इस टैंकर ने बिना किसी वैध राष्ट्रीय ध्वज के ब्रिटेन के समुद्री क्षेत्र में प्रवेश किया। इसके तुरंत बाद, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के निर्देश पर रक्षा मंत्रालय और नेशनल क्राइम एजेंसी ने एक संयुक्त गुप्त अभियान चलाया। चिनूक हेलीकॉप्टर के माध्यम से ‘रॉयल मरीन कमांडोज’ ने चलते हुए जहाज पर उतरकर उसे अपने नियंत्रण में ले लिया और कैप्टन अजय पंत को हिरासत में ले लिया।
न्यायालय ने खारिज की जमानत याचिका
16 जून को कैप्टन पंत को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से साउथेम्प्टन मजिस्ट्रेट कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। उन पर ‘रूस (प्रतिबंध) विनियम 2019’ की धारा 46Z9B के उल्लंघन का अभियोग दर्ज किया गया है। अभियोजन पक्ष का तर्क है कि जहाज पर प्रतिबंधित रूसी तेल की भारी खेप लदी हुई थी।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष के अधिवक्ता जेम्स डायमंड ने न्यायालय में दलील दी कि कैप्टन पंत केवल एक कर्मचारी हैं और उन्होंने केवल अपने उच्चाधिकारियों के आदेशों का पालन किया है। तथापि, न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका को अस्वीकार करते हुए उन्हें जेल भेज दिया। वर्तमान में इस जहाज को ब्रिटेन के डॉर्सेट स्थित वेमाउथ तट के समीप रोक कर रखा गया है, जिस पर भारत और जॉर्जिया के कुल 24 चालक दल (क्रू) सदस्य सवार हैं।
प्रतिबंधित सूची में था जहाज
अभिलेखों के अनुसार, ‘एमवी स्मिर्टोस’ अक्टूबर 2025 से ही ब्रिटेन और यूरोपीय संघ की प्रतिबंधित सूची में सम्मिलित था। यह जहाज पहले कैमरून के राष्ट्रीय ध्वज के अधीन संचालित हो रहा था, परंतु जून 2026 के प्रारंभ में कैमरून ने इसे अपनी रजिस्ट्री से निष्कासित कर दिया। इसके पश्चात यह पोत अवैध रूप से बिना किसी देश के ध्वज के समुद्र में चल रहा था।
परिजनों की गुहार और सरकार की सक्रियता
कैप्टन अजय पंत की पत्नी रितु पंत ने बताया कि उन्हें इस संकट की सूचना किसी भारतीय सरकारी एजेंसी से नहीं, अपितु ब्रिटिश मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त हुई। उन्होंने कहा कि उनके पति विगत 15 वर्षों से पूरी निष्ठा और बेदाग रिकॉर्ड के साथ समुद्री सेवा में कार्यरत हैं। रितु पंत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर अपने पति की सुरक्षित रिहाई की भावुक अपील की है।
इस बीच, उत्तराखंड सरकार भी मामले को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो गई है। राज्य के गृह सचिव शैलेश बगौली ने सूचित किया है कि विदेश मंत्रालय को पत्र प्रेषित कर कैप्टन पंत की सकुशल स्वदेश वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध किया गया है। नई दिल्ली स्थित उत्तराखंड के क्षेत्रीय आयुक्त लगातार केंद्र सरकार के संपर्क में हैं। राहत की बात यह है कि ब्रिटेन स्थित भारतीय उच्चायोग को कैप्टन अजय पंत तक राजनयिक पहुंच (कंसुलर एक्सेस) प्रदान कर दी गई है।


