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देहरादून/नई दिल्ली:

पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बाद उत्पन्न वैश्विक अस्थिरता और पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ‘अलर्ट मोड’ पर आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 27 मार्च को शाम एमएम 6:30 बजे देश भर के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों और राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ एक महत्वपूर्ण वर्चुअल बैठक करेंगे।

​प्धानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा इस संबंध में उत्तराखंड शासन को आधिकारिक पत्र प्राप्त हो चुका है, जिसकी पुष्टि मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने की है।

बैठक के केंद्र में: वैश्विक चुनौतियां और भारत की तैयारी

​यह बैठक महज एक औपचारिक संवाद नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे संघर्षों के बीच भारत की आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखने की एक सोची-समझी रणनीति है। बैठक के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहेंगे:

  • आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain): युद्ध के कारण पेट्रोलियम पदार्थों और अन्य आयातित वस्तुओं की आपूर्ति में आने वाली बाधाओं पर चर्चा।
  • आपातकालीन प्रबंधन: यदि वैश्विक संकट गहराता है, तो राज्यों के पास खाद्य आपूर्ति, ईंधन और लॉजिस्टिक्स को लेकर क्या बैकअप प्लान है?
  • साझा रणनीति: केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना ताकि आम जनता पर महंगाई या कमी का बोझ न पड़े।
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उत्तराखंड के लिए क्यों खास है यह संवाद?

​उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन के अनुसार, राज्य शासन ने बैठक के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। यह बैठक उत्तराखंड के लिए दो कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  1. पर्यटन सीजन: राज्य में पर्यटन सीजन की शुरुआत होने वाली है, जिसमें ईंधन और रसद की सुचारू आपूर्ति अनिवार्य है।
  2. PM का दौरा: अप्रैल के पहले सप्ताह में प्रधानमंत्री का उत्तराखंड दौरा प्रस्तावित है, जिसकी तैयारियों की समीक्षा भी इस दौरान संभव है।
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प्रशासनिक स्तर पर हलचल: विभाग ‘अलर्ट मोड’ पर

​बैठक के मद्देनजर मुख्य सचिव कार्यालय ने खाद्य आपूर्ति, ऊर्जा, परिवहन और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों को अपने आंकड़े और वस्तुस्थिति रिपोर्ट तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। बैठक में भारत सरकार के कैबिनेट सचिव सहित कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी डिजिटल माध्यम से जुड़ेंगे।

विशेषज्ञों का मत: जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री का यह कदम दर्शाता है कि भारत सरकार समय रहते भावी संभावनाओं को भांपकर ‘प्रिवेंटिव मोड’ (निवारक मोड) में काम कर रही है, ताकि वैश्विक संकट का असर देश की विकास गति पर न पड़े।