देहरादून। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में आखिरकार मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया संपन्न हो गई है। देहरादून स्थित राजभवन (लोकभवन) में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में पांच विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। इस विस्तार के साथ ही धामी सरकार ने आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों के बीच संतुलन बनाने का बड़ा दांव खेला है।
कैबिनेट में शामिल हुए ये पांच चेहरे
मुख्यमंत्री धामी की नई टीम में अनुभवी और ऊर्जावान चेहरों को जगह दी गई है:
- मदन कौशिक: हरिद्वार से 5 बार के विधायक और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष।
- खजान दास: राजपुर रोड से विधायक और प्रमुख दलित चेहरा।
- प्रदीप बत्रा: रुड़की से लगातार तीसरी बार के विधायक।
- भरत चौधरी: रुद्रप्रयाग के वरिष्ठ नेता और दूसरी बार के विधायक।
- राम सिंह कैड़ा: नैनीताल जिले की भीमताल सीट से प्रभावशाली विधायक।
गढ़वाल और कुमाऊं के बीच संतुलन
उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों के गणित को समझते हुए कैबिनेट में जिलों का प्रतिनिधित्व तय किया गया है। वर्तमान में कैबिनेट की स्थिति इस प्रकार है:
- गढ़वाल मंडल: सतपाल महाराज (पौड़ी), डॉ. धन सिंह रावत (पौड़ी), सुबोध उनियाल (टिहरी), खजान दास (देहरादून), मदन कौशिक (हरिद्वार), प्रदीप बत्रा (हरिद्वार) और भरत चौधरी (रुद्रप्रयाग)।
- कुमाऊं मंडल: रेखा आर्य (अल्मोड़ा), सौरभ बहुगुणा (ऊधमसिंह नगर) और राम सिंह कैड़ा (नैनीताल)।
अनुभव और दलबदलुओं को भी तरजीह
नई कैबिनेट में भाजपा के पुराने दिग्गज मदन कौशिक की वापसी हुई है, जो खंडूड़ी, निशंक और त्रिवेंद्र सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं। वहीं, कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं का दबदबा भी बरकरार है। प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा कांग्रेस पृष्ठभूमि से हैं, जबकि पुराने मंत्रियों में सतपाल महाराज, सुबोध उनियाल और रेखा आर्य भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।

नए मंत्रियों का प्रोफाइल एक नजर में:
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मंत्री का नाम |
जिला |
विशेषता |
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मदन कौशिक |
हरिद्वार |
5 बार के विधायक, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष। |
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खजान दास |
देहरादून |
दलित वर्ग का बड़ा चेहरा, पूर्व में भी मंत्री रह चुके हैं। |
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प्रदीप बत्रा |
हरिद्वार |
रुड़की से 3 बार के विधायक, क्षेत्र में मजबूत पकड़। |
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भरत चौधरी |
रुद्रप्रयाग |
दो बार के विधायक और संगठन के वरिष्ठ नेता। |
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राम सिंह कैड़ा |
नैनीताल |
भीमताल |
इस विस्तार के बाद अब धामी सरकार की प्राथमिकता विकास कार्यों को गति देना और 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए जमीन तैयार करना है।♦


