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नाबालिग से दुष्कर्म मामले में भड़का जनआक्रोश, होटल में की तोड़फोड़ और जेसीबी से जमींदोज करने की कोशिश

पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत तीन गिरफ्तार, होटल संचालक-मैनेजर पर भी शिकंजा; लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति

रेलवे रोड। शहर के एक होटल में गत 29 अगस्त को एक 16 वर्षीय नाबालिग के साथ हुई दुष्कर्म की वारदात ने पूरे इलाके में जनआक्रोश की चिंगारी भड़का दी। पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी समेत तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी लोगों का गुस्सा शांत नहीं हुआ, और मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में स्थानीय निवासी घटनास्थल पर पहुंच गए।

सुबह 9:30 बजे उमड़ी भीड़, होटल में की तोड़फोड़

मंगलवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे बड़ी तादाद में लोग रेलवे रोड पर एकत्र हो गए। देखते ही देखते भीड़ ने घटना से जुड़े होटल में तोड़फोड़ शुरू कर दी, जिससे आसपास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही वरिष्ठ उपनिरीक्षक नवीन जोशी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास करने लगे। आक्रोशित लोगों ने इस दौरान होटल संचालक की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए और आरोपी के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।

जेसीबी रोककर होटल जमींदोज करने की कोशिश

घटनास्थल पर हालात उस वक्त और तनावपूर्ण हो गए, जब पास से गुजर रही एक जेसीबी मशीन को भीड़ ने रोक लिया। लोगों का इरादा उसी जेसीबी की मदद से होटल की इमारत को ढहा देने का था। पुलिस को काफी मशक्कत के बाद जेसीबी को वहां से हटवाने में सफलता मिली। इस दौरान भीड़ में शामिल कुछ लोग आरोपी को फांसी की सज़ा दिए जाने की मांग को लेकर भी हंगामा करते रहे।

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गिरफ्तारी की जानकारी मिलने पर शांत हुई भीड़

स्थिति को संभालने के लिए पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों को आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की जानकारी दी, जिसके बाद धीरे-धीरे भीड़ का आक्रोश कम होता नज़र आया। हालांकि बारिश होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग सुबह 11 बजे तक होटल के बाहर डटे रहे। किसी भी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए पुलिस ने एहतियातन होटल का शटर बंद करा दिया।

फरार आरोपी हरिद्वार से गिरफ्तार, होटल संचालक-मैनेजर भी हिरासत में

पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद से फरार चल रहे मुख्य आरोपी को सोमवार को हरिद्वार के सिंहद्वार फ्लाईओवर के नीचे से गिरफ्तार किया गया। इसके साथ ही होटल संचालक और मैनेजर को भी हिरासत में लिया गया है। पुलिस का आरोप है कि होटल प्रबंधन ने बिना पहचान संबंधी दस्तावेज़ों की जांच किए ही आरोपी को कमरा उपलब्ध करा दिया था, और नाबालिग को होटल से बाहर ले जाते समय जान-बूझकर सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए थे।

30 अगस्त को दर्ज हुआ था मामला, POCSO एक्ट के तहत मुकदमा

कोतवाली पुलिस के मुताबिक, पीड़िता के परिजन की ओर से 30 अगस्त को तहरीर दी गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि 29 अगस्त की शाम रेलवे रोड स्थित होटल में नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया गया और उसके साथ मारपीट भी की गई। तबीयत बिगड़ने पर परिजन नाबालिग को एम्स में भर्ती कराने के लिए ले गए थे। तहरीर के आधार पर पुलिस ने POCSO एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

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होटल का लाइसेंस निरस्त करने की सिफारिश

कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने होटल संचालक के खिलाफ भी सख्त कदम उठाया है। कोतवाल यशपाल सिंह बिष्ट के मुताबिक, सराय एक्ट के तहत होटल का लाइसेंस निरस्त करने की सिफारिश करते हुए संबंधित रिपोर्ट एसडीएम को भेजी गई है। फिलहाल सुरक्षा की दृष्टि से होटल को पूरी तरह बंद करा दिया गया है, और आसपास के क्षेत्र में तैनात पुलिसकर्मियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।


⚠️ संपादकीय नोट: भारतीय कानून (POCSO एक्ट एवं भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं) के तहत नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करना दंडनीय अपराध है। इस रिपोर्ट में पीड़िता का नाम, पता या किसी भी अन्य पहचान से जुड़ा विवरण जानबूझकर शामिल नहीं किया गया है।


Agresar Bharat Insight

यह घटना दो समानांतर पहलुओं को एक साथ सामने लाती है — एक तरफ एक नाबालिग के साथ हुआ जघन्य अपराध, और दूसरी तरफ उस अपराध पर समाज की सामूहिक प्रतिक्रिया, जो आक्रोश से होते हुए हिंसा के कगार तक पहुंच गई। जनता का गुस्सा स्वाभाविक और समझ में आने वाला है, लेकिन जेसीबी से इमारत गिराने की कोशिश या भीड़ द्वारा खुद ही “सज़ा” तय करने की प्रवृत्ति कानून-व्यवस्था के लिए एक अलग तरह की चुनौती खड़ी कर देती है। न्याय की मांग जायज़ है, पर उसका रास्ता हमेशा वैधानिक प्रक्रिया से होकर ही गुज़रना चाहिए, न कि सड़क पर लिए गए फैसलों से।

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इस मामले में होटल प्रबंधन की भूमिका भी उतनी ही गंभीर जांच की मांग करती है, जितनी मुख्य आरोपी की। बिना पहचान पत्र जांचे कमरा देना और सीसीटीवी बंद करना, यह दिखाता है कि कई बार व्यावसायिक लापरवाही किस तरह एक जघन्य अपराध को अंजाम तक पहुंचाने में परोक्ष रूप से मददगार बन जाती है। ऐसे में सराय एक्ट के तहत लाइसेंस निरस्ती की सिफारिश एक ज़रूरी और सही कदम है, जो अन्य होटल संचालकों के लिए भी एक स्पष्ट चेतावनी का काम करेगा कि पहचान सत्यापन जैसी बुनियादी सावधानियों की अनदेखी अब भारी पड़ सकती है। Agresar Bharat पीड़िता और उसके परिवार के साथ पूरी संवेदना जताते हुए इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नज़र बनाए रखेगा, और पीड़िता की पहचान की सुरक्षा को लेकर पूरी सजगता बरतता रहेगा।

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