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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि सिर्फ शराब की गंध के आधार पर किसी व्यक्ति को नशे में वाहन चलाने या गैर-इरादतन हत्या का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। 🚫

अदालत ने स्पष्ट किया कि इसके लिए वैज्ञानिक प्रमाण जरूरी हैं।


🧪 वैज्ञानिक सबूत जरूरी

न्यायालय के अनुसार:

  • 👉 ब्लड टेस्ट या ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट अनिवार्य
  • 👉 केवल गंध के आधार पर अपराध सिद्ध नहीं
  • 👉 मोटर यान अधिनियम, 1988 के तहत तय सीमा से अधिक अल्कोहल होना साबित करना जरूरी
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👨‍⚖️ किसने सुनाया फैसला?

यह फैसला न्यायमूर्ति आलोक मेहरा ने आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।


🚗 क्या था मामला?

  • आरोपी अमर सिंह जीप चला रहा था
  • वाहन बदरीनाथ धाम से चमोली जा रहा था
  • रास्ते में जीप पलट गई
  • 😟 एक यात्री की मौत, कई घायल

👉 मेडिकल रिपोर्ट में सिर्फ शराब की गंध का जिक्र
👉 ❌ ब्लड सैंपल नहीं लिया गया
👉 ❌ ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट नहीं हुआ

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⚖️ बचाव पक्ष की दलील

  • मोटर यान अधिनियम की धारा 185 के तहत
  • खून में 30 mg/100 ml से अधिक अल्कोहल होना जरूरी
  • बिना वैज्ञानिक जांच दोष सिद्ध नहीं हो सकता

👉 साथ ही यह भी कहा गया कि

  • हादसा चालक की लापरवाही से नहीं
  • बल्कि जीप के टायर फटने के कारण हुआ था

⚖️ अदालत का फैसला

❌ यह धारा हटाई गई:

  • BNS धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या)

✅ ये धाराएं बरकरार:

  • 125(ए) – लापरवाही से जीवन को खतरे में डालना
  • 125(बी) – लापरवाही से दूसरों की सुरक्षा खतरे में डालना
  • 281 – खतरनाक तरीके से वाहन चलाना
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🔴 कोर्ट की अहम टिप्पणी

👉 अभियोजन पक्ष नशे की स्थिति साबित करने में असफल रहा
👉 केवल गंध को पर्याप्त सबूत नहीं माना जा सकता


🧾 क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

  • 🚗 ड्रिंक एंड ड्राइव मामलों में प्रमाण का स्तर तय
  • ⚖️ जांच में वैज्ञानिक तरीकों की अनिवार्यता
  • 👮‍♂️ मनमाने आरोपों पर रोक
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