बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने की मांग पर 11वें दिन भी पदयात्रा, 450 से अधिक लोग जुटे; 27 सितंबर की रैली की तैयारी तेज
राजीव नगर से गैलागेट होते हुए संजयनगर पहुंची जनजागरण पदयात्रा, 200 से अधिक परिवारों से संपर्क; भरत नेगी बोले- पत्रावली केंद्र भेजना क्षेत्र के साथ दोहरे मापदंड जैसा
बिंदुखत्ता/लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर चल रही घर-घर जनजागरण पदयात्रा सोमवार को 11वें दिन भी जारी रही। पदयात्रा के दौरान राजीव नगर से गैलागेट होते हुए संजयनगर तक लोगों से संपर्क किया गया। अभियान में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और युवाओं समेत 450 से अधिक लोगों ने भागीदारी की।
पदयात्रा के दौरान आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने 200 से अधिक परिवारों से संपर्क कर बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिए जाने की मांग के बारे में जानकारी दी। साथ ही लोगों से आगामी 27 सितंबर को प्रस्तावित रैली में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की गई।
सोमवार रात का कार्यक्रम संजयनगर स्थित हनुमान मंदिर में आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।
🚶 11वें दिन भी जारी रहा घर-घर जनजागरण
राजस्व ग्राम की मांग को लेकर चल रहे अभियान का उद्देश्य बिंदुखत्ता के लोगों को आंदोलन से जोड़ना और राजस्व ग्राम की मांग के संबंध में जनजागरूकता बढ़ाना है।
सोमवार को पदयात्रा राजीव नगर से शुरू होकर गैलागेट होते हुए संजयनगर पहुंची। रास्ते में कार्यकर्ताओं ने स्थानीय परिवारों से मुलाकात की और उन्हें आंदोलन के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी।
आयोजकों के अनुसार, अभियान के दौरान लोगों से शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग के समर्थन में आगे आने की अपील की जा रही है।
📑 भरत नेगी ने सरकार की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
पदयात्रा के समापन पर पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष भरत नेगी ने बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिए जाने की प्रक्रिया को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।
उन्होंने वनाधिकार कानून के तहत 75 वर्ष या तीन पीढ़ी की बाध्यता से संबंधित जनजातीय कार्य मंत्रालय के 8 नवंबर 2013 के स्पष्टीकरण का हवाला दिया। नेगी का दावा है कि इसके बाद देशभर में 1700 से अधिक राजस्व ग्राम बनाए जा चुके हैं, जबकि उत्तराखंड में भी छह राजस्व ग्राम बनाए गए हैं।
नेगी ने दावा किया कि इन मामलों में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और सर्वोच्च न्यायालय की अनुमति लिए बिना सीधे राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी की गई है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उनके पास संबंधित प्रमाण और अभिलेख उपलब्ध हैं।
⚖️ ‘पत्रावली केंद्र भेजना सौतेले व्यवहार जैसा’
भरत नेगी ने कहा कि जब देश के अन्य हिस्सों में इसी तरह के मामलों में राजस्व ग्राम बनाए गए हैं तो बिंदुखत्ता की पत्रावली को केंद्र सरकार के पास भेजे जाने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उनका आरोप है कि इससे बिंदुखत्ता के साथ दोहरे मापदंड और ‘सौतेले व्यवहार’ जैसा महसूस हो रहा है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए और जल्द से जल्द आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए अधिसूचना जारी की जाए।
नोट: वनाधिकार कानून, पूर्व के राजस्व ग्रामों और विभिन्न मंत्रालयों/अदालतों की अनुमति से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की गई है। ये बातें आंदोलन से जुड़े वक्ता भरत नेगी के दावों के रूप में सामने आई हैं।
🗣️ ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर नेगी का जवाब
आंदोलन में शामिल लोगों को कथित तौर पर ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने को लेकर भी भरत नेगी ने प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता राजस्व ग्राम की मांग को लेकर चलाया जा रहा अभियान वनाधिकार कानून और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है।
नेगी ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या संगठन को आंदोलन की प्रक्रिया, कानूनी आधार या मांग को लेकर कोई आपत्ति या शंका है तो आरोप-प्रत्यारोप लगाने के बजाय खुले मंच पर आकर कानून और अभिलेखों के आधार पर चर्चा करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता के लोग अपने अधिकारों की मांग को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे हैं और सरकार को उनकी जनभावनाओं का सम्मान करते हुए मामले का जल्द समाधान करना चाहिए।
📢 27 सितंबर की रैली को लेकर घर-घर संपर्क
जनजागरण पदयात्रा के दौरान आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर लोगों को आगामी कार्यक्रम की जानकारी दी। कार्यकर्ताओं ने बताया कि 27 सितंबर को प्रस्तावित रैली को व्यापक बनाने के लिए लगातार जनसंपर्क किया जा रहा है।
इस दौरान लोगों से बड़ी संख्या में रैली में पहुंचने और बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग को मजबूती से उठाने की अपील की गई।
👥 पदयात्रा में बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
सोमवार की पदयात्रा में वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश भट्ट, यात्रा संयोजक अर्जुन नाथ, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू, पूर्व भाजपा मंडल अध्यक्ष भरत नेगी, दीपक जोशी, महेश फुलारा, बलवंत बिष्ट, दीपक पाठक, नंदन बोरा, प्रकाश उत्तराखंडी, धर्मेंद्र कोरंगा, गौला खनन समिति के मनोज दानू, सुशील यादव और दीपक नेगी समेत कई लोग शामिल रहे।
इसके अलावा रामलीला कमेटी संजयनगर के अध्यक्ष गोविंद मेहता सहित सोहन लाल, दीवान सिंह बरगली, धरम सिंह शाही, लक्ष्मण बथयाल, दीपक सिंह बथयाल, दिया शाही, मुन्नी बथयाल, ममता कार्की, कमला कोरंगा, ज्योति मेहता, रमूली कोरंगा, रेखा बथयाल और खष्टी शाही समेत अन्य स्थानीय लोग भी अभियान में शामिल रहे।
🔎 अब 27 सितंबर की रैली पर नजर
11 दिनों से जारी जनजागरण अभियान के बाद अब आंदोलनकारियों का फोकस 27 सितंबर की प्रस्तावित रैली पर है। घर-घर संपर्क के जरिए अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग लंबे समय से स्थानीय स्तर पर उठती रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की ओर से इस प्रक्रिया को लेकर क्या कदम उठाया जाता है और 27 सितंबर की रैली में कितनी बड़ी भागीदारी होती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
🌟 Agresar Bharat Insight 💡
बिंदुखत्ता की राजस्व ग्राम की मांग अब केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह स्थानीय लोगों के बीच लगातार बड़ा जनआंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है। 11वें दिन तक 450 से अधिक लोगों की भागीदारी और 200 से ज्यादा परिवारों से संपर्क यह बताता है कि आंदोलनकारी इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाने की तैयारी में हैं।
अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि सरकार बिंदुखत्ता की मांग पर आगे क्या निर्णय लेती है और 27 सितंबर की प्रस्तावित रैली के बाद आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।


