⚖️ चेक बाउंस मामले में लालकुआं के कारोबारी को 6 माह की सजा, 1.93 लाख रुपये का अर्थदंड
📍 लालकुआं/हल्द्वानी। चेक बाउंस से जुड़े मामले में हल्द्वानी की अदालत ने लालकुआं निवासी कारोबारी मोहम्मद मुस्ताक अहमद को दोषी करार देते हुए छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 1.93 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
यह फैसला अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (विशेष एनआई एक्ट), हल्द्वानी की अदालत ने 12 अगस्त 2026 को सुनाया।
💰 करीब 5 लाख रुपये के बैंक ऋण से जुड़ा था मामला
मामला काशीपुर अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक की लालकुआं शाखा से लिए गए करीब 5 लाख रुपये के बैंक ऋण से संबंधित है।
ऋण की बकाया राशि के भुगतान के लिए आरोपी की ओर से बैंक को 2,61,792 रुपये का चेक दिया गया था। बैंक ने जब चेक को भुगतान के लिए प्रस्तुत किया तो खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण चेक अनादरित यानी बाउंस हो गया।
इसके बाद बैंक की ओर से आरोपी को कानूनी नोटिस भेजकर निर्धारित अवधि में भुगतान करने को कहा गया। भुगतान नहीं होने पर बैंक ने अदालत का रुख किया।
⚖️ धारा 138 के तहत दर्ज हुआ मुकदमा
बैंक की ओर से परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत मामला दर्ज कराया गया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से चेक को सुरक्षा चेक बताते हुए बचाव किया गया। उनका पक्ष था कि चेक वास्तविक बकाया भुगतान के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा के तौर पर दिया गया था।
हालांकि, अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
🔎 अदालत ने इन तथ्यों को माना महत्वपूर्ण
मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर अदालत ने कई बिंदुओं को महत्वपूर्ण माना।
🔹 चेक पर आरोपी के हस्ताक्षर थे।
🔹 आरोपी पर बैंक ऋण की बकाया देनदारी थी।
🔹 बैंक की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस की तामील हुई थी।
🔹 खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं होने के कारण चेक बाउंस हुआ।
🔹 मुकदमे के दौरान आरोपी की ओर से अलग-अलग तारीखों में कुल 74,500 रुपये जमा किए गए।
इन तथ्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को धारा 138 के तहत दोषी माना।
🧑⚖️ अदालत ने सुनाई छह माह की सजा
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मीनाक्षी शर्मा ने मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी को:
➡️ 6 माह का साधारण कारावास
➡️ 1.93 लाख रुपये का अर्थदंड
की सजा सुनाई।
अदालत ने अर्थदंड में से 1.83 लाख रुपये काशीपुर अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक, लालकुआं शाखा को क्षतिपूर्ति के रूप में दिए जाने का आदेश दिया है।
🚨 अर्थदंड नहीं जमा किया तो एक माह अतिरिक्त जेल
अदालत के आदेश के मुताबिक यदि आरोपी 1.93 लाख रुपये का अर्थदंड जमा नहीं करता है, तो उसे इसके बदले एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
📌 क्या कहती है धारा 138?
Negotiable Instruments Act की धारा 138 चेक के अनादरण से जुड़े मामलों में लागू होती है। सामान्य तौर पर जब भुगतान के लिए प्रस्तुत किया गया चेक पर्याप्त धनराशि न होने जैसी वजह से बाउंस हो और कानून में निर्धारित शर्तों के तहत नोटिस एवं भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद रकम का भुगतान न किया जाए, तो मामला आपराधिक मुकदमे तक पहुंच सकता है।
🧾 मामले का पूरा सार
🏦 बैंक: काशीपुर अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक, लालकुआं शाखा
💰 ऋण: करीब 5 लाख रुपये
📝 चेक: 2,61,792 रुपये
❌ स्थिति: चेक बाउंस
⚖️ कानून: धारा 138, Negotiable Instruments Act
👤 आरोपी: मोहम्मद मुस्ताक अहमद
📅 फैसला: 12 अगस्त 2026
⛓️ सजा: 6 माह साधारण कारावास
💵 अर्थदंड: 1.93 लाख रुपये
🏦 क्षतिपूर्ति: 1.83 लाख रुपये बैंक को
➕ अर्थदंड न देने पर: 1 माह अतिरिक्त साधारण कारावास
📝 AgresarBharat की नजर
यह मामला बताता है कि चेक को केवल सुरक्षा के तौर पर दिए जाने का दावा अपने आप में पर्याप्त बचाव नहीं माना जाता; अदालत उपलब्ध साक्ष्यों और मामले की वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेती है।
⚠️ नोट: यह खबर उपलब्ध न्यायिक विवरण के आधार पर तैयार की गई है। कानूनी मामलों में दोषसिद्धि और सजा से संबंधित जानकारी को अदालत के आदेश के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।


