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नैनीताल। वैश्विक स्तर पर गहराते ईंधन संकट और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते अत्यधिक दबाव के बीच नैनीताल पुलिस ने समाज के सामने एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया है। जनपद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. मंजूनाथ टीसी ने खुद को एक रोल मॉडल के रूप में प्रस्तुत करते हुए सरकारी चौपहिया वाहन का त्याग किया और मोटरसाइकिल (बुलेट) से कार्यालय व फील्ड निरीक्षण के लिए निकल पड़े।

​अधिकारियों ने भी अपनाया सादगी का मार्ग

​एसएसपी की इस पहल का ‘डोमिनो इफेक्ट’ पुलिस महकमे में भी साफ तौर पर देखा गया। अपने कप्तान से प्रेरणा लेते हुए जनपद के कई अन्य पुलिस अधिकारी भी वाहनों को छोड़ पैदल ही अपने गंतव्य और कार्यालयों तक पहुंचे। सरोवर नगरी नैनीताल सहित पूरे जिले में पुलिस प्रशासन अब आमजन से भी इस अभियान का हिस्सा बनने की अपील कर रहा है।

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​एसएसपी का संदेश: “राष्ट्रहित में छोटी बचत, बड़ा बदलाव”

​अभियान के दौरान डॉ. मंजूनाथ टीसी ने नागरिकों से संवाद करते हुए कहा:

​”वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ईंधन बचाना केवल व्यक्तिगत बचत नहीं, बल्कि एक राष्ट्र सेवा है। यदि हम अपनी दैनिक जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करें—जैसे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग, कार-पूलिंग या कम दूरी के लिए पैदल चलना—तो हम न केवल देश की अर्थव्यवस्था में मदद करेंगे, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रख पाएंगे।”

 

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​जनता के लिए मुख्य अपील:

​नैनीताल पुलिस ने इस पहल के माध्यम से आम नागरिकों को निम्नलिखित सुझाव अपनाने का आग्रह किया है:

  • ​सार्वजनिक परिवहन: निजी वाहनों की जगह बस या अन्य साझा साधनों का उपयोग करें।
  • ​कार-पूलिंग: दफ्तर जाने के लिए सहकर्मियों के साथ वाहन साझा करें।
  • ​पैदल भ्रमण: स्वास्थ्य और पर्यावरण के हित में कम दूरी के लिए पैदल चलें।
  • ​दोपहिया वाहनों को वरीयता: अनावश्यक रूप से बड़े वाहनों के प्रयोग से बचें।
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​निष्कर्ष:

नैनीताल पुलिस की यह पहल केवल एक प्रतीकात्मक संदेश नहीं, बल्कि प्रशासनिक नेतृत्व की सजगता का प्रमाण है। जब सत्ता और व्यवस्था के शीर्ष पर बैठे अधिकारी स्वयं जमीन पर उतरकर सादगी का संदेश देते हैं, तो वह समाज में गहरा प्रभाव डालता है। ‘अग्रसर भारत’ पुलिस की इस सकारात्मक सोच की सराहना करता है।

​रिपोर्ट: ब्यूरो डेस्क, अग्रसर भारत

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