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लालकुआं (अग्रसर भारत)।

बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की मांग को लेकर कल, 18 फरवरी को लालकुआं तहसील में होने वाले महा-आंदोलन से पहले शासन-प्रशासन पूरी तरह ‘एक्शन मोड’ में आ गया है। एक ओर जहाँ संयुक्त संघर्ष समिति भारी जनसैलाब उमड़ने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न विभागों ने इस भीड़ को नियंत्रित करने या विभाजित करने के लिए अपनी रणनीति बदल दी है।

शिक्षा विभाग का कड़ा रुख: बंद स्कूल खोलने के निर्देश

​आंदोलन की संवेदनशीलता और भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए बिन्दुखत्ता क्षेत्र के कई निजी स्कूलों ने पहले ही कल (बुधवार) को अवकाश घोषित कर दिया था। लेकिन, प्रशासन ने इसे आंदोलन को समर्थन या व्यवस्था में व्यवधान माना है। खंड शिक्षा अधिकारी हल्द्वानी ने आनन-फानन में सख्त आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि क्षेत्र के सभी स्कूल खुले रहेंगे।

  • सीधे आदेश: मुख्य शिक्षा अधिकारी कल स्वयं बिन्दुखत्ता क्षेत्र के स्कूलों का भ्रमण करेंगे।
  • बदला फैसला: शिक्षा विभाग की इस सख्ती के बाद, जो स्कूल प्रबंधन छुट्टी का मैसेज भेज चुके थे, वे अब देर रात बच्चों को स्कूल आने के दोबारा मैसेज भेज रहे हैं।
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वन विकास निगम की चाल: खुलेंगे गौला निकासी गेट

​आंदोलन में ग्रामीणों और विशेषकर ट्रैक्टर-ट्रॉली मालिकों की भागीदारी को देखते हुए वन विकास निगम ने भी बड़ा निर्णय लिया है। बुधवार को गौला नदी के तमाम निकासी गेट खोलने का आदेश दिया गया है। जानकारों का मानना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि श्रमिक और वाहन स्वामी काम में व्यस्त रहें और तहसील प्रदर्शन में भीड़ कम हो सके।

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प्रशासन का शिकंजा बनाम जनता का संकल्प

​कल होने वाले इस प्रदर्शन में भारी संख्या में महिलाओं, युवाओं और पूर्व सैनिकों के शामिल होने की उम्मीद है। जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने और तहसील घेराव के इस कार्यक्रम को निष्प्रभावी करने के लिए प्रशासन की इन कोशिशों ने क्षेत्र में नई चर्चा छेड़ दी है।

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अग्रसर भारत की अपील: शंका समाधान और सतर्कता

​क्षेत्र की जनता और अभिभावकों के बीच उपजे असमंजस को देखते हुए यह स्पष्ट है कि कल स्कूल खुले रहेंगे। आंदोलनकारी संगठनों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की बात कही है, वहीं प्रशासन की पैनी नजर हर गतिविधि पर टिकी है। अब देखना यह होगा कि कल लालकुआं की सड़कों पर जनशक्ति भारी पड़ती है या प्रशासनिक घेराबंदी।

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