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लालकुआं (अग्रसर भारत न्यूज)। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन में एक नया मोड़ आया है। वन अधिकार समिति संगठन के अध्यक्ष उमेश भट्ट ने जानकारी दी है कि सरकार द्वारा समय मांगे जाने पर आंदोलनकारी ग्रामीण 10 दिनों की मोहलत देने पर सहमत हो गए हैं। संगठन ने निर्णय लिया है कि यदि इन 10 दिनों के भीतर राजस्व ग्राम की अधिसूचना जारी करने की दिशा में कोई ठोस कदम या काम नहीं हुआ, तो उसके ठीक अगले दिन से लालकुआं तहसील प्रांगण में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया जाएगा।

​रविवार को हुई महारैली के बाद ग्रामीणों ने सरकार को 5 अक्टूबर तक यानी 10 दिन का समय देते हुए तहसील में अनिश्चितकालीन धरने का अल्टीमेटम दिया है।

​25 सितंबर की बैठक पर उठे सवाल: फाइल दोबारा जिला समिति को क्यों भेजी?

​आंदोलनकारियों ने सवाल उठाया कि 25 सितंबर 2025 को हुई बैठक के बाद बिंदुखत्ता से जुड़े मामले को फिर से जिला स्तरीय समिति को भेजे जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जिला स्तरीय समिति पहले ही अपनी प्रक्रिया पूरी कर चुकी थी, तो फाइल को वापस उसी स्तर पर भेजने का क्या औचित्य है? पिछले कई महीनों से शासन और प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर पूछा जा रहा है कि उनके दावों में क्या कमी है, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।

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​ग्रामीणों के बीच पहुंचे कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा

​आंदोलन के बीच कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ग्रामीणों से वार्ता करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बिंदुखत्ता के निवासियों को अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं और सरकार समस्या के स्थायी समाधान के लिए लगातार प्रयासरत है।

​मंत्री ने कहा कि वह ऐसा कोई खोखला आश्वासन नहीं देना चाहते जिसे पूरा न किया जा सके। इसलिए सरकार उन गांवों के दस्तावेजों का अध्ययन करवा रही है जो पहले वन भूमि या खत्ते थे और बाद में उन्हें राजस्व ग्राम का दर्जा मिला।

​रामपुर और हरिद्वार के मॉडल से निकाला जाएगा रास्ता

​राम सिंह कैड़ा ने बताया कि रामनगर के रामपुर और हरिद्वार क्षेत्र के ऐसे गांवों के अभिलेख व प्रक्रियाओं का परीक्षण किया जाएगा जिन्हें राजस्व ग्राम बनाया जा चुका है। उन्हीं मानकों के आधार पर बिंदुखत्ता का रास्ता तलाशा जाएगा। मुख्यमंत्री के दिल्ली से लौटने के बाद इस विषय पर उच्च स्तरीय वार्ता होगी।

​“बिंदुखत्ता मेरे घर जैसा है। मेरा बचपन लालकुआं और बिंदुखत्ता में बीता है। इस क्षेत्र की बसावट और विकास में पूर्व सैनिकों का ऐतिहासिक योगदान रहा है और सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर गंभीर है।”

— राम सिंह कैड़ा, कैबिनेट मंत्री

 

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​ग्रामीणों का स्पष्ट रुख: ‘साढ़े नौ साल से भरोसा ही कर रहे हैं, अब कार्रवाई चाहिए’

​मंत्री के संबोधन के बाद आंदोलनकारियों ने उनका स्वागत किया, लेकिन अपनी मांगों पर अड़े रहे। ग्रामीण नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री पर भरोसा करते हुए साढ़े नौ साल बीत चुके हैं। अब उन्हें केवल मौखिक आश्वासन नहीं बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई चाहिए। हालांकि, ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि सरकार दूसरे राजस्व गांवों के दस्तावेजों के आधार पर रास्ता तलाशना चाहती है, तो वे इस प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे।

​गौला नदी के कटाव और बाढ़ की समस्या पर भी घेरा

​राजस्व ग्राम के मुद्दे के साथ ग्रामीणों ने गौला नदी से होने वाले भू-कटाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल चैनलाइजेशन के नाम पर केवल अस्थायी कार्य होते हैं, जिससे हर बरसात में मकानों और जमीनों पर खतरा मंडराता रहता है। ग्रामीणों ने स्थायी सुरक्षा दीवार बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि राजस्व ग्राम का दर्जा मिलने से बाढ़ प्रभावितों को मुआवजा और अन्य अधिकार स्पष्ट रूप से मिल सकेंगे।

​शांतिपूर्ण रहेगा आंदोलन, नहीं करेंगे चक्का जाम

​आंदोलनकारियों ने अपनी लोकतांत्रिक और जिम्मेदार कार्यशैली का परिचय देते हुए स्पष्ट किया कि:

  • ​किसी भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी के खिलाफ नारेबाजी (जिंदाबाद-मुर्दाबाद) नहीं होगी।
  • ​आम जनता, मरीजों और एंबुलेंस की आवाजाही को प्रभावित करने वाला ‘चक्का जाम’ जैसा कदम नहीं उठाया जाएगा।
  • ​आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और सरकार द्वारा वार्ता के लिए बुलाए जाने पर ही प्रतिनिधि वार्ता करेंगे।
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​शहीदों की भूमि बिंदुखत्ता की उपेक्षा पर चिंता

​प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने याद दिलाया कि बिंदुखत्ता वीर प्रसूता भूमि है। यहां से देश की रक्षा करते हुए 16 जवान शहीद हुए हैं, जिनमें एक अशोक चक्र विजेता भी शामिल हैं। ऐसे सम्मानित और राष्ट्रभक्त क्षेत्र के लोगों की जायज मांग को इतने लंबे समय तक लटकाए रखना बेहद चिंताजनक है।

​अब 10 दिन की मोहलत और 5 अक्टूबर पर टिकीं नजरें

​वन अधिकार समिति संगठन के अध्यक्ष उमेश भट्ट के अनुसार, सरकार को दी गई 10 दिनों की मोहलत के तहत अब 5 अक्टूबर तक का इंतजार किया जाएगा। हालांकि अप्रैल 2026 में भी मुख्यमंत्री ने बिंदुखत्ता के भूमिधरी अधिकारों को लेकर केंद्र सरकार के स्तर पर पैरवी की बात कही थी, लेकिन अब देखना यह होगा कि इन 10 दिनों में सरकार अधिसूचना जारी करने की दिशा में क्या ठोस कदम उठाती है। यदि इस अवधि में कोई ठोस प्रगति नहीं दिखाई देती है, तो अगले ही दिन से तहसील प्रांगण में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया जाएगा।

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