
चम्पावत। उत्तराखंड में दूध के उचित खरीद मूल्य की मांग को लेकर पशुपालकों की आवाज तेज होने लगी है। किसान मंच उत्तराखंड ने 15 अक्टूबर 2026 से चम्पावत में अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का ऐलान किया है। संगठन की प्रमुख मांग गाय के दूध का खरीद मूल्य 61 रुपये और भैंस के दूध का 71 रुपये प्रति लीटर निर्धारित करना है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा क्षेत्र चम्पावत में प्रस्तावित इस आंदोलन के जरिए संगठन ने पशुपालकों की आर्थिक समस्याओं और दूध उत्पादन की बढ़ती लागत का मुद्दा उठाया है। किसान मंच का कहना है कि पशुपालकों को उनकी मेहनत के अनुरूप उचित मूल्य मिलना चाहिए, ताकि पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालन ग्रामीण परिवारों की आजीविका का मजबूत साधन बना रहे।
दो सप्ताह का अल्टीमेटम, कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन
किसान मंच उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष कार्तिक उपाध्याय के अनुसार, संगठन ने 1 अक्टूबर 2026 को डेयरी विकास निदेशक को ज्ञापन सौंपकर दूध के खरीद मूल्य में वृद्धि समेत पशुपालकों की समस्याओं से अवगत कराया था। संगठन का दावा है कि विभाग को मांगों पर कार्रवाई के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया, लेकिन संतोषजनक समाधान सामने नहीं आने के कारण धरना शुरू करने का निर्णय लिया गया।
संगठन ने संबंधित विभाग से मांगों पर की गई कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक करने की भी अपेक्षा जताई है। उसका कहना है कि केवल ज्ञापन देने से समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि इसके लिए ठोस नीतिगत कदम उठाने जरूरी हैं।
गाय और भैंस के दूध की निर्धारित दर बढ़ाने की मांग
किसान मंच ने दूध के खरीद मूल्य को लेकर दो प्रमुख मांगें रखी हैं:
- गाय का दूध: 61 रुपये प्रति लीटर।
- भैंस का दूध: 71 रुपये प्रति लीटर।
संगठन के मुताबिक, पशुपालकों को चारे, पशुओं की देखभाल और अन्य जरूरी खर्चों पर लगातार पैसा खर्च करना पड़ता है। ऐसे में दूध का खरीद मूल्य इस तरह निर्धारित किया जाना चाहिए, जिससे लागत निकालने के बाद पशुपालकों को उचित आर्थिक लाभ मिल सके।
किसान मंच का मानना है कि दूध का उचित मूल्य मिलने से ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ेगी और पहाड़ी क्षेत्रों में पशुपालन को प्रोत्साहन मिलेगा। हालांकि, ये संगठन की मांगें हैं और इन दरों को सरकार की ओर से मंजूरी दिए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
चम्पावत में आंदोलन की प्रशासन को दी सूचना
किसान मंच के अनुसार, 10 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालय और पुलिस क्षेत्राधिकारी कार्यालय में प्रस्तावित धरने की लिखित सूचना दी गई थी। संगठन के प्रतिनिधियों ने पुलिस क्षेत्राधिकारी से मुलाकात कर आंदोलन के उद्देश्य और मांगों की जानकारी भी दी।
संगठन ने कहा है कि धरना शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किया जाएगा। साथ ही प्रशासन से आवश्यक सहयोग की अपेक्षा जताई गई है।
प्रदेश अध्यक्ष कार्तिक उपाध्याय ने कहा कि आंदोलन शुरू होने से पहले भी सरकार और संबंधित विभाग के पास पशुपालकों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने का अवसर है। संगठन का कहना है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन पशुपालकों के आर्थिक हितों से जुड़े मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगा।
गोल्ज्यू महाराज के दरबार में न्याय की प्रार्थना
धरने की तैयारियों के बीच कार्तिक उपाध्याय चम्पावत स्थित न्याय के देवता गोल्ज्यू महाराज के दरबार में भी पहुंचे। किसान मंच की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने पशुपालकों की मांगों से संबंधित प्रचार सामग्री अर्पित कर आंदोलन की सफलता और पशुपालकों को न्याय मिलने की प्रार्थना की।
संगठन ने बताया कि इस दौरान मंदिर के पुजारी से आशीर्वाद और समर्थन भी प्राप्त हुआ।
पशुपालकों और किसान संगठनों से एकजुट होने की अपील
किसान मंच उत्तराखंड ने प्रदेश के पशुपालकों, दुग्ध समितियों, सचिव संगठनों, किसान संगठनों और सामाजिक संगठनों से आंदोलन में सहयोग करने की अपील की है।
संगठन का कहना है कि पशुपालन पहाड़ी क्षेत्रों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि उत्पादकों को दूध का उचित मूल्य नहीं मिलता है, तो उनकी आय प्रभावित होती है और इस व्यवसाय को लंबे समय तक जारी रखना कठिन हो सकता है।
15 अक्टूबर से धरना, सरकार के रुख पर नजर
चम्पावत में 15 अक्टूबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन धरने के साथ दूध के खरीद मूल्य का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आने की संभावना है। किसान मंच ने स्पष्ट किया है कि उसका उद्देश्य किसी राजनीतिक पदाधिकारी का इस्तीफा मांगना नहीं, बल्कि पशुपालकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाना है।
अब देखना होगा कि राज्य सरकार और डेयरी विकास विभाग गाय के दूध के लिए 61 रुपये तथा भैंस के दूध के लिए 71 रुपये प्रति लीटर की मांग पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या आंदोलन शुरू होने से पहले कोई समाधान निकल पाता है।



