
देहरादून। उत्तराखंड शासन ने राज्य कर्मचारियों से जुड़े एक अहम निर्णय लेते हुए ‘पर्वतीय विकास भत्ता’ का नाम बदलकर ‘उत्तराखंड विकास भत्ता’ करने को मंजूरी दे दी है। नए आदेश के बाद यह भत्ता राज्य के पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों को समान रूप से देय होगा।
वित्त विभाग की ओर से जारी शासनादेश के मुताबिक, पहले 1 अक्टूबर 2013 से निर्धारित दरों के आधार पर यह भत्ता पर्वतीय क्षेत्रों में तैनात कार्मिकों को दिया जाता था। इसके बाद सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के क्रम में वर्ष 2019 में व्यवस्था में संशोधन किया गया था।
राज्यपाल ने दी नाम परिवर्तन को मंजूरी
शासनादेश में कहा गया है कि भत्ते को लेकर बनी अस्पष्टता को दूर करने के लिए विचार-विमर्श के बाद वित्त विभाग के शासनादेश में ‘पर्वतीय विकास भत्ता’ के स्थान पर ‘उत्तराखंड विकास भत्ता’ किए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। राज्यपाल ने इस संशोधन को स्वीकृति प्रदान कर दी है।
मैदानी और पर्वतीय कर्मचारियों को समान लाभ
शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि उत्तराखंड विकास भत्ता निर्धारित छठे वेतनमान की अनुमन्य दरों के आधार पर दिया जाएगा। वर्ष 2013 के शासनादेश के अनुसार अब मैदानी और पर्वतीय, दोनों क्षेत्रों में कार्यरत कार्मिकों को यह भत्ता समान रूप से देय होगा।
सरकार के इस फैसले से प्रदेश के कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर उन कार्मिकों के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके बीच भत्ते की पात्रता और इसके नाम को लेकर लंबे समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।
शासनादेश की प्रतियां महालेखाकार उत्तराखंड, राज्यपाल सचिवालय, विधानसभा सचिवालय, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, रेजिडेंट कमिश्नर समेत संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई हैं।



