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देहरादून/रुद्रपुर: उत्तराखंड एसटीएफ (STF) की साइबर क्राइम टीम ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है। टीम ने लालकुआँ (नैनीताल) निवासी एक युवक को गिरफ्तार किया है, जिसने अपने साथियों के साथ मिलकर ऋषिकेश के एक सीनियर सिटिजन से करीब 69 लाख रुपये ठग लिए थे।

​खौफ दिखाकर की गई करोड़ों की ठगी

​एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अजय सिंह ने बताया कि ऋषिकेश निवासी पीड़ित को व्हाट्सएप कॉल के जरिए जाल में फंसाया गया था। जालसाजों ने खुद को दिल्ली के दरियागंज थाने का पुलिस अधिकारी और कोर्ट का कर्मचारी बताकर पीड़ित को बुरी तरह डरा दिया। ठगों ने दावा किया कि पीड़ित के आधार कार्ड का उपयोग कर अवैध सिम कार्ड खरीदे गए हैं, जिनका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गंभीर आपराधिक गतिविधियों में हो रहा है।

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​’डिजिटल अरेस्ट’ का मायाजाल

​पीड़ित को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर घंटों तक ऑनलाइन निगरानी यानी ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया। इसके बाद संपत्ति सत्यापन, एनओसी (NOC) और जमानत दिलाने के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में कुल 69 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।

​जांच में खुले चौंकाने वाले राज

 

 

​साइबर थाना देहरादून में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान एसटीएफ ने आरोपी भगवत सरन (33 वर्ष) को चिन्हित किया।

  • फर्जी फर्म और बैंक खाता: आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर ‘रुद्रा टेलीकॉम’ के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार किए और एक्सिस बैंक में खाता खुलवाया।
  • अपराध का इतिहास: जांच में सामने आया कि इस बैंक खाते के खिलाफ NCRP पोर्टल पर 30 शिकायतें पहले से दर्ज हैं। इसी खाते में पीड़ित के 6 लाख रुपये भी ट्रांसफर हुए थे।
  • बरामदगी: पुलिस ने आरोपी के पास से ठगी में प्रयुक्त मोबाइल फोन और दो डेबिट कार्ड बरामद किए हैं।
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​एसटीएफ की सख्त कार्रवाई

​मूल रूप से बरेली (उत्तर प्रदेश) का रहने वाला आरोपी भगवत सरन वर्तमान में लालकुआँ में रह रहा था। एसटीएफ ने उसे रुद्रपुर से गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है और बैंक खातों के डिजिटल साक्ष्यों की गहनता से पड़ताल कर रही है।

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सावधान रहें: एसटीएफ ने आम जनता से अपील की है कि पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी व्हाट्सएप या वीडियो कॉल के माध्यम से ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कार्रवाई नहीं करती है। ऐसे किसी भी कॉल आने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।

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