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हल्द्वानी/नई दिल्ली:

हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में रेलवे की भूमि पर वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण विवाद पर उच्चतम न्यायालय ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संतुलित निर्णय सुनाया है। न्यायालय ने एक ओर जहाँ रेलवे के विकास संबंधी अधिकारों को सर्वोपरि माना है, वहीं दूसरी ओर वहां निवास कर रहे हजारों परिवारों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उनके व्यवस्थित पुनर्वास की रूपरेखा भी तैयार की है।

न्यायालय का कड़ा रुख: “कब्जा करने वाले रेलवे की जरूरत तय नहीं करेंगे”

​सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि रेलवे के पास अन्य रिक्त भूमि उपलब्ध है और एक साथ 50,000 लोगों का विस्थापन व्यवहार्य नहीं है। इस पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट रूप से असंतोष व्यक्त करते हुए टिप्पणी की कि रेलवे को अपनी विकास योजनाओं के लिए किस भूमि का चयन करना है, इसका निर्णय अतिक्रमणकारी नहीं कर सकते। केंद्र सरकार ने भी स्पष्ट किया कि हल्द्वानी रेलवे ट्रैक विस्तार के लिए यह 36 एकड़ भूमि तकनीकी रूप से अनिवार्य है।

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पुनर्वास के लिए ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार: फैसले की मुख्य बातें

​न्यायालय ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार को निम्नलिखित दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का आदेश दिया है:

  • आर्थिक संबल: प्रभावित होने वाले प्रत्येक परिवार को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संयुक्त रूप से ₹2,000 प्रति माह का गुजारा भत्ता प्रदान किया जाएगा। यह सहायता आगामी 6 माह तक जारी रहेगी।
  • पीएम आवास योजना: आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) श्रेणी के पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • विशेष पंजीकरण कैंप: पात्रों की पहचान और फॉर्म भरने के लिए 19 मार्च (ईद के उपरांत) विशेष कैंप लगाए जाएंगे। जिलाधिकारी नैनीताल को इसकी संपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करने का उत्तरदायित्व सौंपा गया है।
  • पुनर्वास केंद्र की स्थापना: बनभूलपुरा क्षेत्र में ही एक ‘पुनर्वास केंद्र’ स्थापित किया जाएगा, जहाँ परिवार के मुखिया अपनी पात्रता और विस्थापन संबंधी जानकारी साझा कर सकेंगे।
  • हर्जाने का प्रावधान: क्षेत्र की 13 संपत्तियों को ‘फ्री होल्ड’ माना गया है, जिनके लिए रेलवे और राज्य सरकार उचित मुआवजा देने पर सहमत हुए हैं।
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प्रशासनिक सक्रियता और सुरक्षा

​उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अप्रैल 2026 में होने वाली अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई या अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया पर रोक रहेगी। जिलाधिकारी नैनीताल और उप-जिलाधिकारी (SDM) हल्द्वानी को निर्देश दिया गया है कि वे सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से घर-घर जाकर नागरिकों को इस योजना के प्रति जागरूक करें।

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मानवीय संवेदना का संदेश:

जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायालय नागरिकों की विपरीत परिस्थितियों के प्रति संवेदनशील है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ और गरिमापूर्ण वातावरण में रहने का संवैधानिक अधिकार है, और यह पुनर्वास प्रक्रिया इसी दिशा में एक कदम है।

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