लालकुआं/बिंदुखत्ता। बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की वर्षों पुरानी मांग को लेकर रविवार को आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया। सुबह से ही बिंदुखत्ता में हजारों ग्रामीण जुटने लगे और देखते ही देखते पूरा क्षेत्र आंदोलनकारियों से भर गया। इसके बाद निकली विशाल रैली लालकुआं तहसील पहुंची, जहां ग्रामीणों ने सरकार के सामने अपनी मांगों को मजबूती से रखा।
आंदोलन के बीच सरकार की ओर से कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ग्रामीणों के बीच पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों से बातचीत की और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संदेश भी ग्रामीणों तक पहुंचाया। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार बिंदुखत्ता की समस्या का समाधान निकालने की दिशा में गंभीरता से काम कर रही है।
हालांकि, मंत्री के आश्वासन के बावजूद आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। ग्रामीणों ने साफ कर दिया कि अब केवल मौखिक आश्वासन से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। इसके बाद तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने का ऐलान कर दिया गया।
आज का आंदोलन बिंदुखत्ता के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि करीब 44 दिनों से चल रहे जनजागरूकता अभियान और पदयात्रा के बाद हजारों लोग एकजुट होकर सड़क पर उतरे।
15 अगस्त से घर-घर पहुंच रहे थे ग्रामीण
बिंदुखत्ता वनाधिकार संगठन के नेतृत्व में ग्रामीणों ने बताया कि मौजूदा आंदोलन की तैयारी अचानक नहीं हुई है। 15 अगस्त से लगातार घर-घर और गांव-गांव पदयात्रा चलाकर लोगों को वन अधिकार कानून, राजस्व ग्राम के अधिकार और बिंदुखत्ता की कानूनी स्थिति के बारे में जानकारी दी जा रही थी।
आंदोलनकारियों के अनुसार रविवार को इस अभियान का 44वां दिन था।
ग्रामीणों का कहना है कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा देने की मांग करीब पांच दशक पुरानी है। इस दौरान दो पीढ़ियां गुजर चुकी हैं और अब तीसरी पीढ़ी आंदोलन की अगुवाई कर रही है।
आंदोलनकारियों ने कहा कि वे नहीं चाहते कि आने वाली चौथी पीढ़ी भी इसी समस्या को लेकर धरना-प्रदर्शन करती रहे।
11,703 दावेदारों का मामला और 19 जून 2024 की स्वीकृति
आंदोलनकारियों की ओर से बताया गया कि बिंदुखत्ता के 32 गांवों के 11,703 दावेदारों से जुड़े वन अधिकार दावों को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी। संगठन के अनुसार 19 जून 2024 को जिला स्तरीय वन अधिकार समिति (DLC) ने इन दावों को सर्वसम्मति से स्वीकृति दी थी।
इसके बावजूद राजस्व ग्राम की अंतिम अधिसूचना जारी नहीं हो सकी।
ताजा स्थानीय रिपोर्टों में भी यही मुद्दा सामने आया है कि बिंदुखत्ता के राजस्व ग्राम से जुड़ी प्रक्रिया लंबे समय से शासन स्तर पर लंबित है।
ग्रामीणों का आरोप है कि फाइल लंबे समय तक शासन स्तर पर रही और बाद में प्रक्रिया को दोबारा जिला स्तरीय समिति की ओर भेजे जाने की स्थिति बनी।
इसी को लेकर ग्रामीण लगातार अधिकारियों और शासन से जवाब मांगते रहे हैं।
25 सितंबर 2025 की बैठक का भी उठाया मुद्दा
आंदोलनकारियों ने कहा कि 25 सितंबर 2025 को हुई बैठक के बाद बिंदुखत्ता से जुड़ा मामला दोबारा जिला स्तरीय समिति के स्तर पर भेजे जाने की बात सामने आई।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि जिला स्तरीय समिति पहले ही प्रक्रिया पूरी कर चुकी थी तो फिर उनकी फाइल को दोबारा उसी स्तर पर भेजने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से वे शासन और अधिकारियों को पत्र लिखकर यह पूछ रहे हैं कि उनके दावों में आखिर क्या कमी है, जिसके कारण राजस्व ग्राम की अधिसूचना आगे नहीं बढ़ पा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार इस संबंध में उन्हें अभी तक संतोषजनक और स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।
मंत्री राम सिंह कैड़ा पहुंचे ग्रामीणों के बीच
रविवार को आंदोलन के बीच कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ग्रामीणों के बीच पहुंचे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बिंदुखत्ता के लोगों को अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं और सरकार समस्या का समाधान निकालने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें ग्रामीणों के बीच जाने और उनसे बातचीत करने के लिए कहा है।
उन्होंने ग्रामीणों से मुख्यमंत्री पर भरोसा रखने की अपील की।
मंत्री ने यह भी कहा कि वह ग्रामीणों को ऐसा आश्वासन नहीं देना चाहते जिसे बाद में पूरा न किया जा सके। इसलिए सरकार दूसरे क्षेत्रों में वन भूमि से जुड़े उन गांवों के दस्तावेजों का अध्ययन करना चाहती है जिन्हें राजस्व ग्राम का दर्जा मिल चुका है।
रामपुर और हरिद्वार के गांवों के दस्तावेजों से तलाशा जाएगा रास्ता
कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ने बताया कि अधिकारियों और वन विभाग से उन गांवों के अभिलेख मंगाने को कहा गया है, जो पहले वन क्षेत्र या खत्ते के रूप में रहे और बाद में राजस्व ग्राम बने।
उन्होंने कहा कि रामनगर क्षेत्र के रामपुर तथा हरिद्वार क्षेत्र के अन्य ऐसे गांवों के दस्तावेजों और प्रक्रिया का परीक्षण किया जाएगा।
मंत्री के अनुसार, जिन मानकों और आधार पर इन गांवों को राजस्व ग्राम का दर्जा मिला, उनका अध्ययन कर बिंदुखत्ता के मामले में भी कोई रास्ता निकालने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने अधिकारियों से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है और कहा कि मुख्यमंत्री के दिल्ली से लौटने के बाद इस मामले में उनसे बातचीत की जाएगी।
मंत्री बोले—’बिंदुखत्ता मेरे घर जैसा है’
ग्रामीणों से बातचीत के दौरान राम सिंह कैड़ा ने अपने बिंदुखत्ता से पुराने संबंध का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि उनका बचपन लालकुआं और बिंदुखत्ता में बीता है और छात्र राजनीति के दौरान भी उन्हें यहां के लोगों का समर्थन मिला।
उन्होंने बिंदुखत्ता के पूर्व सैनिकों का जिक्र करते हुए कहा कि क्षेत्र के विकास और बसावट में पूर्व सैनिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी पूर्व सैनिक के परिवार से आते हैं और बिंदुखत्ता की समस्या को लेकर सरकार संवेदनशील है।
ग्रामीण बोले—’भरोसा साढ़े नौ साल से कर रहे हैं, अब ठोस कदम चाहिए’
मंत्री की बात सुनने के बाद आंदोलनकारियों ने उनका सम्मान किया और सरकार के प्रतिनिधि के रूप में ग्रामीणों के बीच आने के लिए धन्यवाद दिया।
लेकिन इसके साथ ही ग्रामीण नेताओं ने अपना रुख भी साफ कर दिया।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की ओर से भरोसा रखने की बात कही जा रही है, लेकिन भरोसा करते-करते करीब साढ़े नौ साल बीत चुके हैं।
अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए।
ग्रामीणों ने कहा कि सरकार यदि दूसरे राजस्व गांवों के दस्तावेजों के आधार पर बिंदुखत्ता का रास्ता तलाशना चाहती है तो वे भी उस प्रक्रिया में सहयोग करने को तैयार हैं।
लेकिन इसके लिए उन्हें स्पष्ट तारीख, स्पष्ट प्रक्रिया और ठोस बातचीत चाहिए।
‘ज्ञापन नहीं देंगे, आज हमारे हाथ खाली हैं’
इस आंदोलन की एक खास बात यह भी रही कि ग्रामीणों ने इस बार पारंपरिक तरीके से ज्ञापन देने से अलग रास्ता अपनाया।
आंदोलनकारियों ने कहा कि वर्षों से परंपरा रही है कि आंदोलन या रैली के बाद अधिकारी को ज्ञापन सौंप दिया जाता है और फिर आंदोलन समाप्त हो जाता है।
लेकिन इस बार ग्रामीणों ने कहा कि उनके हाथ में कोई ज्ञापन नहीं है।
उनका कहना था कि सारे दस्तावेज और फाइलें सरकार के पास हैं और सरकार के प्रतिनिधि खुद ग्रामीणों के बीच पहुंचे हैं।
इसलिए इस बार वे ज्ञापन देने के बजाय सरकार के प्रतिनिधि से सीधे जवाब और आगे की प्रक्रिया जानना चाहते हैं।
वन अधिकार कानून और दूसरे गांवों का उदाहरण
ग्रामीणों ने कहा कि उनकी मांग वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रावधानों से जुड़ी हुई है।
उन्होंने दावा किया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में वन क्षेत्र से जुड़े गांवों को संबंधित कानूनी प्रक्रिया के तहत राजस्व ग्राम का दर्जा दिया गया है।
उत्तराखंड में भी रामनगर और हरिद्वार क्षेत्र के कुछ गांवों का उदाहरण देते हुए आंदोलनकारियों ने सवाल उठाया कि यदि समान परिस्थितियों वाले दूसरे गांवों के लिए रास्ता निकाला गया है तो बिंदुखत्ता के मामले में भी उसी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का परीक्षण क्यों नहीं किया जा रहा?
ग्रामीणों ने कहा कि वे इसी सवाल का स्पष्ट जवाब चाहते हैं।
क्षतिपूरक वन और नर्वनीकरण को लेकर भी सरकार से सवाल
बिंदुखत्ता के आंदोलन में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा क्षतिपूरक वनरोपण/नर्वनीकरण से जुड़ा सामने आया।
आंदोलनकारियों ने कहा कि यदि बिंदुखत्ता के मामले में वन भूमि के बदले क्षतिपूरक भूमि उपलब्ध कराने की आवश्यकता पड़ती है तो इतनी बड़ी मात्रा में भूमि कहां से आएगी, यह सरकार को स्पष्ट करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता का क्षेत्र बड़ा है और यदि उसके बराबर या निर्धारित अनुपात में क्षतिपूरक भूमि की आवश्यकता होगी तो यह एक गंभीर तकनीकी और प्रशासनिक प्रश्न है।
ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे विषयों पर केवल बयान देने के बजाय सरकार और ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच टेबल पर बैठकर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।
‘बिंदुखत्ता का प्रतिनिधि बातचीत की मेज पर होना चाहिए’
आंदोलनकारियों ने कहा कि बिंदुखत्ता के भविष्य से जुड़े फैसलों में क्षेत्र के प्रतिनिधियों को भी बातचीत में शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनता अब अपने अधिकारों और कानूनों को पढ़ रही है और अपने मामले को कानूनी तरीके से समझकर आगे बढ़ा रही है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार उन्हें आधिकारिक बातचीत के लिए बुलाती है तो वे निश्चित रूप से वार्ता में शामिल होंगे।
लेकिन इसके लिए पहले बैठक की तारीख तय करनी होगी।
गौला नदी के कटाव और बाढ़ का मुद्दा भी गरमाया
राजस्व ग्राम के साथ ग्रामीणों ने गौला नदी से होने वाले कटाव और बाढ़ की समस्या को भी जोरदार तरीके से उठाया।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान नदी के किनारे रहने वाले परिवारों की जमीन और मकानों पर लगातार खतरा बना रहता है।
कई परिवारों को रात में भी अपने घरों की सुरक्षा को लेकर चिंता रहती है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हर साल चैनलाइजेशन और कटाव रोकने के नाम पर अस्थायी कार्य होते हैं, लेकिन अगली बरसात में समस्या फिर सामने आ जाती है।
उन्होंने स्थायी सुरक्षा दीवार और स्थायी समाधान की मांग की।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि क्षेत्र को राजस्व ग्राम का दर्जा मिलता है तो प्रभावित परिवारों को जमीन और मकान से जुड़े सरकारी मुआवजे एवं अन्य अधिकारों की प्रक्रिया में भी स्पष्टता आएगी।
‘चक्का जाम नहीं करेंगे, आम जनता को परेशानी नहीं देंगे’
आंदोलनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही तय किया गया है कि किसी के खिलाफ जिंदाबाद-मुर्दाबाद के नारे नहीं लगाए जाएंगे।
आंदोलनकारियों ने यह भी कहा कि वे चक्का जाम जैसे कदम नहीं उठाएंगे, क्योंकि इससे आम जनता, मरीजों और एंबुलेंस को परेशानी हो सकती है।
उन्होंने कहा कि वे सरकार के खिलाफ टकराव नहीं चाहते बल्कि कानून के दायरे में रहते हुए अपनी मांग का समाधान चाहते हैं।
शहीदों की भूमि है बिंदुखत्ता
आंदोलन के दौरान बिंदुखत्ता के पूर्व सैनिकों और शहीदों का भी उल्लेख किया गया।
आंदोलनकारियों ने कहा कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक परिवार रहते हैं और यहां से देश की सेवा करने वाले लोगों का लंबा इतिहास रहा है।
उन्होंने बताया कि बिंदुखत्ता की धरती से जुड़े 16 लोग शहीद हुए हैं, जिनमें एक अशोक चक्र विजेता का नाम भी बताया गया।
ग्रामीणों ने कहा कि ऐसे क्षेत्र के लोगों की मांग को लंबे समय तक लंबित रखना उनके लिए गंभीर चिंता का विषय है।
अब तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरना
कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा के साथ बातचीत के बाद भी आंदोलन समाप्त नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने साफ घोषणा की कि वे आज से लालकुआं तहसील परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे।
आंदोलनकारियों ने कहा कि सरकार जब भी उन्हें वार्ता के लिए बुलाएगी, वे धरना स्थल से ही वार्ता के लिए जाएंगे और बातचीत के बाद वापस धरना स्थल पर लौटेंगे।
उनका कहना है कि जब तक उन्हें ठोस कार्रवाई और राजस्व ग्राम की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट प्रगति दिखाई नहीं देती, आंदोलन जारी रहेगा।
अब सरकार के अगले कदम पर टिकी नजर
बिंदुखत्ता में रविवार को हुए इस बड़े प्रदर्शन के बाद अब गेंद पूरी तरह सरकार के पाले में है।
एक तरफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से समाधान की दिशा में प्रयास करने का संदेश ग्रामीणों तक पहुंचाया गया है और कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा ने दूसरे राजस्व ग्रामों के दस्तावेजों के आधार पर रास्ता तलाशने की बात कही है। अप्रैल 2026 में भी मुख्यमंत्री ने बिंदुखत्ता के भूमिधरी अधिकार के समाधान के लिए केंद्र सरकार के स्तर पर पैरवी की बात कही थी।
दूसरी ओर ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि अब केवल भरोसे या मौखिक आश्वासन के आधार पर आंदोलन खत्म नहीं होगा।
रविवार की महारैली के बाद तहसील परिसर में शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना इस लंबे आंदोलन को एक नए चरण में ले गया है।
अब देखना होगा कि सरकार और बिंदुखत्ता के ग्रामीण प्रतिनिधियों के बीच अगली वार्ता कब होती है और राजस्व ग्राम की वर्षों पुरानी मांग पर आगे क्या ठोस कदम उठाया जाता है।


