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बिंदुखत्ता (लालकुआं):

बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने हेतु छिड़ा आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। वन अधिकार संगठन एवं पूर्व सैनिक संगठन के संयुक्त मोर्चे के तत्वावधान में आयोजित धरना प्रदर्शन बुधवार को भी पूरे जोश के साथ जारी रहा। शहीद स्मारक स्थल पर एकत्रित सैकड़ों ग्रामीणों ने सरकार की नीतियों के विरुद्ध रोष व्यक्त करते हुए जोरदार नारेबाजी की।

अधिकारों की लड़ाई और ‘एफआरए’ पर मंथन

प्रदर्शनकारियों ने ‘जन-जन की सरकार कब आएगी बिंदुखत्ता’ के गगनभेदी नारों के साथ क्षेत्र की उपेक्षा पर सवाल उठाए। इस दौरान आयोजित एक खुली बैठक में वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर घंटों तक गहन चर्चा हुई। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि राजस्व ग्राम का दर्जा न मिलना केवल एक प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव और ग्रामीणों का दर्द

स्थानीय निवासियों ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि राजस्व ग्राम न होने के कारण उन्हें मालिकाना हक के कागजात नहीं मिल पा रहे हैं। इस कारण न तो उन्हें बैंक से ऋण मिल पाता है और न ही प्रधानमंत्री आवास जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ। युवाओं ने क्षेत्र में रोजगार और बुनियादी ढांचे की कमी पर आक्रोश जताया, वहीं महिलाओं ने बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की अनुपलब्धता को लेकर सरकार को घेरा।

जनशक्ति का प्रदर्शन: प्रमुख व्यक्तित्वों की उपस्थिति

इस विशाल जनआंदोलन को समाज के हर वर्ग का समर्थन मिल रहा है। धरने में क्षेत्र के कई दिग्गज नेता और सामाजिक कार्यकर्ता सक्रिय रूप से शामिल रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:

  • ​पूर्व मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल, पूर्व विधायक नवीन दुम्का और हरेंद्र बोरा।
  • ​हेमवतीनंदन दुर्गापाल, उमेश भट्ट, बीना जोशी, खिलाफ सिंह दानू और बलवंत बिष्ट।
  • ​के0 प्रताप बिष्ट, नंदन बोरा, दीपक जोशी, दीपक नेगी और ललित कांडपाल।
  • ​पूरन परिहार, खीम सिंह कार्की, प्रकाश उत्तराखंडी, विक्की पाठक और पुष्कर दानू।
  • ​हीरा सिंह बिष्ट, चन्द्र सिंह दानू, बलवंत सम्भल, अर्जुन नाथ गोस्वामी और प्रमोद कॉलोनी।
  • ​शेखर जोशी, भरत नेगी, भगवान सिंह धामी, बलवंत सिंह, संध्या डालाकोटी, वीरेंद्र दानू।
  • ​पूर्व सैनिक प्रकाश मिश्रा, गौलापार से अर्जुन बिष्ट, हेमंत बगड़वाल और नन्दन बिष्ट। कैप्टन इंद्र सिंह पनेरी, राजेंद्र सिंह चौहान, और मोहन कुड़ाई। रज्जी बिष्ट, उमेश सुयाल, गोपाल नेगी, और भूपेश जोशी।​ गौरव जोशी, प्रकाश जोशी, देवेंद्र गोस्वामी, और भगत सिंह जी।​ फूला देवी, उर्मिला धामी।

​ बैठक में उपस्थित सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि बिंदुखत्ता के विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए इसे राजस्व गांव का दर्जा मिलना अनिवार्य है। इसके बिना क्षेत्र का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है।

​धरना स्थल पर मौजूद सैकड़ों ग्रामीणों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि जब तक बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित नहीं किया जाता, यह आंदोलन थमेगा नहीं।

फोटो परिचय: बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर शहीद स्मारक पर धरना देते ग्रामीण एवं पूर्व सैनिक।

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